आम की पैदावार 10-20% रहने का अनुमान, कम सप्लाई के बावजूद किसानों को कम मिल रहे दाम

आम की पैदावार 10-20% रहने का अनुमान, कम सप्लाई के बावजूद किसानों को कम मिल रहे दाम

तेलंगाना के आम किसानों को इस साल भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि पैदावार सिर्फ 10-20% रहने का अनुमान है. बेमौसम बारिश, कोहरे और कीटों के हमले के कारण फसल प्रभावित हुई है. कम सप्लाई के बावजूद किसानों को पिछले साल की तुलना में कम कीमत मिल रही है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Apr 10, 2026,
  • Updated Apr 10, 2026, 11:47 AM IST

तेलंगाना के आम किसानों को इस साल जनवरी में जब उनके बाग फूलों से लदे थे, तब अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी. लेकिन, जैसे-जैसे कटाई का सीजन करीब आ रहा है, वे आम की पैदावार सिर्फ 10-20% होने का अनुमान लगा रहे हैं.

राज्य के जगतियाल, महबूबनगर और नागरकुरनूल जिले आम के बागों के लिए मशहूर हैं. इन जिलों के किसानों ने कम पैदावार के अनुमान की पुष्टि की और कहा कि इस साल उन्हें बागों से कोई कमाई नहीं होगी. उन्होंने बताया कि हिमायत और बेनीशान किस्मों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है.

किसानों के अलावा, थोक व्यापारियों और निर्यात से जुड़े दूसरे लोगों ने भी कहा कि इस साल राज्य में आम का उत्पादन बहुत कम रहेगा. हालांकि, बागवानी विभाग के अधिकारियों ने शुरुआती अनुमान में कहा कि पैदावार लगभग 50-70% रहेगी. यह आंकड़ा किसानों से मिली जानकारी और अपने निरीक्षण के आधार पर निकाला गया है. उन्होंने कहा कि कुछ हफ्तों में, जब किसान फलों की कटाई करेंगे, तब ज्यादा सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा.

कम सप्लाई के बावजूद कीमतें कम

जहां एक तरफ सप्लाई कम होने का अनुमान है, वहीं किसानों को पिछले साल के मुकाबले कम कीमतें मिली हैं. इस पर किसानों का कहना है कि 'कम सप्लाई, ज्यादा मांग और ज्यादा कीमत' वाले नियम भी अब फेल हो रहे हैं क्योंकि दाम में किसी तरह का इजाफा नहीं है.

सीजन की शुरुआत में किसानों को मिली कीमत

जगतियाल के कोरुटला में 19 एकड़ जमीन के मालिक मितपल्ली प्रताप रेड्डी ने 'दि हिंदू' से कहा, "पिछले आम सीजन की शुरुआत में हमें बेनीशान किस्म के लिए लगभग 80-100 रुपये प्रति किलो मिले थे, जो धीरे-धीरे कुछ हफ्तों में कम होते गए. लेकिन इस सीजन की शुरुआत में हमें इस किस्म के लिए सिर्फ 50 रुपये प्रति किलो मिले. हमें समझ नहीं आ रहा कि जब सप्लाई भी कम है, तो कीमतें इतनी कम क्यों हैं. हमें उम्मीद है कि जैसे-जैसे दिन बीतेंगे, हमें बेहतर कीमतें मिलेंगी."

खुदरा बाजारों में, गड्डियानारम फल मंडी के पास, इस हफ्ते बेनीशान किस्म का आम 100-150 रुपये प्रति किलो बिका.

कम पैदावार की वजह

बागवानी अधिकारियों ने बताया कि सर्दियों में कम तापमान की वजह से पूरे राज्य में आम के पेड़ों पर खूब फूल आए थे, लेकिन फरवरी में कोहरा और उसके बाद बेमौसम बारिश के कारण थ्रिप्स और हॉपर जैसे कीटों का हमला हो गया. बागवानी विभाग के संयुक्त निदेशक बी. बाबू ने कहा, “आम के पेड़ों पर मंजर बने रहने के लिए 40 डिग्री सेल्सियस से कम का सही तापमान जरूरी होता है. मौसम में बदलाव की वजह से थ्रिप्स और हॉपर कीटों का हमला हुआ.”

महबूबनगर के बालनगर में बाग वाले मुरलीधर रेड्डी ने कहा, “सीधे शब्दों में कहें तो, मौसम में बदलाव ही इसकी मुख्य वजह है. मौसम के हालात पेड़ों के लिए नहीं, बल्कि थ्रिप्स और हॉपर कीटों के लिए ज्यादा सही थे.” किसान ने बताया कि उन्हें शायद सिर्फ 5% या उससे भी कम पैदावार मिलेगी.

नागरकुर्नूल के कलवाकोलु के पुजारी बलराज ने बताया कि हालांकि उन्हें अपने सात एकड़ के खेत से करीब 30 टन पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन शायद उन्हें सिर्फ 1 से 1.5 टन ही मिल पाएगी.

दूसरे राज्यों में आम की सप्लाई

गड्डियानारम मार्केट यार्ड के थोक फल व्यापारियों ने बताया कि उन्हें भी अब तक फलों की काफी कम मात्रा देखने को मिली है. एक व्यापारी ने कहा, “यहां लाए गए ज्यादातर आम दूसरे राज्यों में भेजे जाते हैं.” उस समय मजदूर आमों की ग्रेडिंग (छंटाई) कर रहे थे और उन्हें क्रेट और कार्टन में पैक कर रहे थे. बाद में उन्होंने आमों से भरे क्रेट उन लॉरियों पर लाद दिए जिन पर राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और दूसरे राज्यों की रजिस्ट्रेशन प्लेट लगी हुई थीं.

गड्डियानारम कृषि बाजार समिति के सिलेक्शन ग्रेड सचिव लोकिनी श्रीनिवास ने कहा, “गड्डियानारम मार्केट यार्ड में लाए गए आमों में से सिर्फ 30-40% ही स्थानीय तौर पर इस्तेमाल होते हैं. बाकी 60-70% आम राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में भेजे जाते हैं.”

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