
गुजरात सरकार ने खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच किसानों के हित में अहम निर्णय लिया है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य में नर्मदा परियोजना की नहरों से सिंचाई के लिए पानी तय कार्यक्रम से पहले जारी करने को मंजूरी दे दी है. सरकार के फैसले के बाद 11 जून 2026 से किसानों को नर्मदा नहर नेटवर्क के जरिए सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाएगा. नर्मदा कमांड क्षेत्र से जुड़े कई सांसदों और विधायकों ने किसानों की सिंचाई जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पानी जल्दी छोड़े जाने की मांग मुख्यमंत्री के सामने रखी थी. इसके बाद मुख्यमंत्री ने नर्मदा परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर जल उपलब्धता और सिंचाई जरूरतों की समीक्षा की.
बैठक में परियोजना में उपलब्ध जल भंडार की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई. साथ ही यह भी देखा गया कि खरीफ सीजन की शुरुआत में किसानों को सिंचाई की कितनी जरूरत पड़ सकती है. समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों की फसलों को ध्यान में रखते हुए सिंचाई जल की आपूर्ति पहले शुरू की जाए ताकि खेती से जुड़े काम प्रभावित न हों और समय पर खेतों तक पानी पहुंच सके.
इस उच्चस्तरीय बैठक में सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश पुरी, जल आपूर्ति विभाग की प्रधान सचिव शाहमीना हुसैन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव विक्रांत पांडे, सचिव अजय कुमार, कमांड एरिया डेवलपमेंट और नहर प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. बैठक में परियोजना संचालन और जल वितरण व्यवस्था पर भी चर्चा की गई.
इसी दौरान राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े आंकड़े भी साझा किए. सरकार के अनुसार, योजना शुरू होने के बाद से गुजरात में 69.25 लाख से अधिक किसान परिवारों को 22 किस्तों के जरिए 23,083 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई है.
सरकार का कहना है कि योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कई स्तरों पर डिजिटल सत्यापन व्यवस्था लागू की गई. इसमें भूमि रिकॉर्ड सत्यापन, बैंक खातों से आधार लिंकिंग, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और ई-केवाईसी को चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य बनाया गया, ताकि सहायता केवल पात्र किसानों तक पहुंचे और बिचौलियों की भूमिका कम हो सके. (एएनआई)