
देश में कपास के उत्पादन में गिरावट का रुझान देखा जा रहा है क्योंकि कुछ किसानों ने अधिक मुनाफा देने वाली दूसरी फसलों की खेती शुरू कर दी है. हाल के कपास सीजन के दौरान, घरेलू कपास उत्पादन 2020-21 में 352.48 लाख गांठों से घटकर 2025-26 में 290.91 लाख गांठें रह गया है. सरकार ने शुक्रवार को संसद को यह जानकारी दी. कपड़ा राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने राज्यसभा में बताया कि उत्पादन में इस बदलाव का मुख्य कारण कपास की खेती के रकबे में बदलाव है, क्योंकि कुछ किसानों ने ज्यादा मुनाफा देने वाली दूसरी फसलों को अपना लिया है.
कपास की उत्पादकता के बारे में सरकार ने बताया कि यह मोटे तौर पर 428-451 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के दायरे में स्थिर रही है. साथ ही, कपास की कीमतों पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की मौजूदा स्थितियों का असर दिखा है.
हाल के समय में, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कपास की कीमतों में लगभग 19% की तेजी हुई, जबकि घरेलू कपास की कीमतों (S-6 किस्म) में लगभग 18% की बढ़ोतरी हुई. देश में घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए, जरूरत पड़ने पर कच्चे कपास और सूती धागे का आयात किया जाता है.
सरकार ने बताया, आयात सहित देश में कपास की कुल उपलब्धता घरेलू कपड़ा उद्योग की जरूरतों को पूरा करती है. अनुमानित उत्पादन, बचा हुआ स्टॉक (कैरी-ओवर स्टॉक) और आयात अनुमानित खपत को पूरा करते हैं और कपास की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है. सरकार ने कपड़ा उद्योग को सहारा देने के लिए समय पर कदम उठाए हैं, जिसमें सही रेट पर कच्चे कपास की पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने के लिए 01.06.2026 से 31.10.2026 तक कपास के आयात पर 11% इंपोर्ट ड्यूटी में छूट देना शामिल है.
सरकार ने कपड़ा उद्योग के लिए अच्छी क्वालिटी वाले कपास की उपलब्धता बनाए रखने के लिए एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास पर आयात शुल्क से छूट को भी जारी रखा है, जो 20.02.2024 से लागू है.
इसके अलावा, सरकार ने कपास की उत्पादकता बढ़ाने और क्वालिटी में सुधार के लिए 5,659.22 करोड़ रुपये के बजट के साथ कपास उत्पादकता मिशन (कपास क्रांति) (2026-27 से 2030-31) को मंजूरी दी है. सरकार ने पहले ही बताया है कि उसने 2026–31 के लिए 5,664 करोड़ रुपये के बड़े प्रोग्राम के तहत 'कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन' में 'न्यू एज फाइबर्स' के लिए 300 करोड़ रुपये का खास हिस्सा शामिल किया है. 2026–27 के बजट में घोषित 'नेशनल फाइबर मिशन' में प्रोडक्शन बढ़ाने और ब्रांड डेवलपमेंट के लिए भी प्रावधान हैं.
यह मिशन "5F" विजन पर आधारित है- फार्म (खेत), फाइबर (रेशा), फैक्टरी (कारखाना), फैशन और फॉरेन (विदेश). इस मिशन का लक्ष्य 2031 तक उत्पादन को 297 लाख गांठों से बढ़ाकर 498 लाख गांठें करना है. इसमें 14 राज्यों के 140 जिलों में 24 लाख हेक्टेयर जमीन शामिल होगी और इससे लगभग 32 लाख किसानों को फायदा होगा.
कपास पर एक विशेष प्रोजेक्ट (NFSM के तहत) भी शुरू किया गया है. 2023-24 से कपास पैदा करने वाले 8 प्रमुख राज्यों में चल रहे इस प्रोजेक्ट में 'हाई-डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम' (HDPS) और 'क्लोजर स्पेसिंग प्लांटिंग सिस्टम' जैसी तकनीकें शामिल की गई हैं. फ़ील्ड ट्रायल में HDPS के तहत पैदावार में लगभग 40 प्रतिशत और क्लोजर स्पेसिंग के तहत 32 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई है.
कपास की MSP खरीद के लिए एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है, जिससे किसान खुद रजिस्टर कर सकते हैं, खरीद के लिए स्लॉट बुक कर सकते हैं, आधार से जुड़े पेमेंट पा सकते हैं और रियल-टाइम SMS अपडेट पा सकते हैं. इस पर 41 लाख से ज्यादा किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है.