Wheat Procurement: गेहूं खरीद के अपने ही लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाती है सरकार, पढ़ें डिटेल

Wheat Procurement: गेहूं खरीद के अपने ही लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाती है सरकार, पढ़ें डिटेल

Wheat Procurement जैसे ही गेहूं खरीद का वक्त आता है तो सरकार खरीद के बड़े-बड़े आंकड़े जारी कर देती है. करोड़ों टन में गेहूं खरीद की बात कही जाती है. लेकिन खरीद शुरू होने के दो महीने बाद ही असलियत सामने आने लगती है. वहीं एमएसपी पर गेहूं बेचने को किसान तैयार बैठे रहते हैं. कुछ नियमों के चलते भी किसान गेहूं नहीं बेच पाते हैं.

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • May 08, 2026,
  • Updated May 08, 2026, 3:00 PM IST

हर साल रबी सीजन में सरकार गेहूं की खरीद करती है. खरीद से पहले लक्ष्य तय किया जाता है. गेहूं खरीद के लिए भारी-भरकम और बड़े आंकड़े रखे जाते हैं. लेकिन हैरत की बात ये है कि सरकार खुद अपने ही तय किए गए लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाती है. ये कहानी किसी एक साल के गेहूं खरीद की नहीं है. बीते चार साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकार के लक्ष्य और प्राप्ति के आंकड़ों का खुलासा हो जाता है. जबकि किसान इस इंतजार में है कि उसे मौका मिले तो वो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरकार को गेहूं बेचे. 

लेकिन खरीद के नियम ऐसे बना दिए गए हैं कि एमएसपी में ज्यादा पैसा मिलने के बाद भी किसान 100-200 रुपये प्रति क्विंटल कम में ओपन मार्केट में बेच रहे हैं. इस साल तो हालात और भी खराब हैं. गेहूं खरीद करने वाली एजेंसिया अभी भी लक्ष्य से दो करोड़ टन पीछे चल रही हैं. जबकि गोदामों में भी पहले से ही गेहूं भरा हुआ है. ऐसे में इस बार भी लक्ष्य पीछे छूटता हुआ दिखाई दे रहा है.   

गेहूं खरीद का कब-कितना लक्ष्य रखा 

गेहूं की कटाई के साथ ही सरकार गेहूं खरीद के लक्ष्य तय कर देती हैं. गेहूं खरीद वाले सभी 11 राज्यों को उनके उत्पादन के हिसाब से लक्ष्य दे दिए जाते हैं. लेकिन जानकारों की मानें तो कई बार सरकार खुद गेहूं खरीद के लक्ष्यों को संशोधि‍त भी करती है. 

  • साल 2022-23 में 4 करोड़, 43 लाख और 82 हजार टन का लक्ष्य रखा गया था. जबकि खरीद 1 करोड़, 87 लाख और 49 हजार टन गेहूं की हुई थी. 
  • साल 2023-24 में 3 करोड़, 41 लाख और 50 हजार टन का लक्ष्य रखा गया था. जबकि खरीद 2 करोड़, 60 लाख और 71 हजार टन गेहूं की हुई थी. 
  • साल 2024-25 में 3 करोड़, 72 लाख और 90 हजार टन का लक्ष्य रखा गया था. जबकि खरीद 2 करोड़, 65 लाख और 94 हजार टन गेहूं की हुई थी. 
  • साल 2025-26 में 3 करोड़, 32 लाख और 70 हजार टन का लक्ष्य रखा गया था. जबकि खरीद 2 करोड़, 99 लाख और 87 हजार टन गेहूं की हुई थी.
  • साल 2026-27 में 3 करोड़, 44 लाख और 97 हजार टन का लक्ष्य रखा गया था. जबकि खरीद 1 करोड़, 43 लाख टन गेहूं की खरीद 7 मई तक हो चुकी है. 

किसान और मंडी के लिए ये हैं नियम

एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए किसानों को अपनी फसल मंडी में लानी होती है. और सरकार ने मंडी के लिए कुछ नियम बनाए हैं. पहला नियम तो यही है कि किसानों को अपना खुद का रजिस्ट्रेशन कराना होगा. साथ ही उस वाहन का भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा जिसमे वो अपनी फसल लाएंगे. इसके साथ ही किसानों को अपनी फसल मंडी में लाने के लिए एक टाइम स्लॉट दिया जाएगा. उस टाइम स्लॉट पर किसान से गेहूं खरीदा जाएगा. 

नियमों ने रोके किसानों के बढ़ते कदम

बहुत सारे ऐसे किसान हैं जिनके पास अपना कोई वाहन नहीं है. किराए के वाहन में उन्हें गेहूं मंडी ले जाना होता है. ऐसे में वो किस वाहन का रजिस्ट्रेशन कराएं. पता चला जिस वाहन का पहले रजिस्ट्रेशन कराया है वो मंडी आने के वक्त किराए पर मिला ही नहीं. दूसरा ये कि जब किसान गेहूं लेकर मंडी के गेट पर जाता है तो उसका बायोमीट्रिक होता है. अगर सर्वर सही काम कर रहा है तो वक्त से काम हो जाता है, नहीं तो इंतजार करो. इस इंतजार करने के चक्कर में किराए के वाहन का भाड़ा बढ़ता रहता है. वहीं जो टाइम स्लॉट मिला है वो भी सर्वर डाउन होने के चलते निकल जाता है.  

ये भी पढ़ें- केंद्र के आंकड़ों में 'जीरो' है मध्य प्रदेश की गेहूं खरीद, पढ़ें बाकी राज्यों का हाल

ये भी पढ़ें- पशुपालकों और पर्यावरण तक के लिए ऐसे फायदेमंद है वाइट रेवोलुशन-2

MORE NEWS

Read more!