धान की MSP पर पूर्व कृषि वैज्ञानिक ने उठाए सवाल, 40,000 करोड़ का नुकसान

धान की MSP पर पूर्व कृषि वैज्ञानिक ने उठाए सवाल, 40,000 करोड़ का नुकसान

देश में धान की MSP को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. इस बार सवाल किसी राजनीतिक नेता ने नहीं, बल्कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेन्द्र सिंह लाठर ने उठाए हैं. आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा.

धान की MSP पर कृषि वैज्ञानिक ने उठाए सवालधान की MSP पर कृषि वैज्ञानिक ने उठाए सवाल
क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 15, 2026,
  • Updated May 15, 2026, 12:33 PM IST

खरीफ सीजन के लिए धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी के बाद एक बार फिर बहस तेज हो गई है. इस बार सवाल किसी राजनीतिक नेता ने नहीं, बल्कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेन्द्र सिंह लाठर ने उठाए हैं. उनका कहना है कि सरकार की मौजूदा धान खरीद और MSP नीति की वजह से देश को हर साल करीब 40 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है.

'कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं किसान'

दरअसल, 13 मई 2026 को केंद्र सरकार ने कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर सामान्य धान का MSP 2,441 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया.  यह पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 72 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा है. यानी MSP में लगभग 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है. ऐसे में डॉ. लाठर का कहना है कि यह बढ़ोतरी महंगाई दर से भी कम है. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है, जबकि किसानों को सिर्फ 3 प्रतिशत की राहत दी गई. डॉ. लाठर के मुताबिक, इससे साफ होता है कि सरकार की नीतियां किसानों के हित में नहीं हैं. उनका आरोप है कि लगातार कम MSP देकर सरकार खेती को घाटे का सौदा बना रही है, जिससे किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं.

डॉ. लाठर ने CACP की रिपोर्ट का दिया हवाला

उन्होंने CACP की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2024-25 में देश में लगभग 150 मिलियन मीट्रिक टन धान का उत्पादन हुआ, जबकि सरकार ने करीब 50 मिलियन मीट्रिक टन धान की खरीद की. सरकारी खरीद में पंजाब, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और हरियाणा जैसे राज्यों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही. पंजाब ने करीब 10.3 मिलियन मीट्रिक टन और हरियाणा ने 4.1 मिलियन मीट्रिक टन धान की सरकारी खरीद में योगदान दिया.

स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले से बढ़े धान का MSP

डॉ. लाठर ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 2026-27 के लिए धान की कुल औसत लागत यानी C-2 लागत 2,162 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है. स्वामीनाथन आयोग के C-2+50 प्रतिशत फार्मूले के हिसाब से धान का MSP करीब 3,243 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए. लेकिन सरकार ने A-2+FL लागत के आधार पर MSP तय किया है, जिससे किसानों को प्रति क्विंटल करीब 802 रुपये का नुकसान होता है.

सरकार की गलत नीति से 40,000 करोड़ का नुकसान

उन्होंने दावा किया कि सरकार हर साल करीब 50 मिलियन मीट्रिक टन धान की खरीद करती है. ऐसे में MSP कम तय करने से किसानों को सालाना 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होगा. डॉ. लाठर का कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर हरियाणा और पंजाब के किसानों पर पड़ेगा, क्योंकि सरकारी धान खरीद में इन राज्यों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रहती है. 

MORE NEWS

Read more!