
महाराष्ट्र के वाशिम जिले में बारिश के बाद आई बाढ़ ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जिले की सीमा से लगे कई गांवों में कांच नदी और उतावली नदी का पानी खेतों में घुस गया, जिससे बड़ी संख्या में किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं. अचानक आई बाढ़ के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. जानकारी के मुताबिक, पड़ोसी बुलढाणा जिले में हुई तेज बारिश के बाद कांच नदी और उतावली नदी में जलस्तर बढ़ गया.
इसके चलते वाशिम जिले के पिंपरी सरहद, कुकसा, नेतंसा और कायोली समेत नदी किनारे बसे कई गांवों के खेतों में पानी भर गया. खेतों में पानी घुसने से किसानों द्वारा लगाई गई हल्दी, मिर्च, बैंगन और अन्य फसलें प्रभावित हुई हैं. कई जगहों पर तेज बहाव के कारण फसलों के बीज तक बह जाने की बात सामने आई है.
बाढ़ से प्रभावित किसानों का कहना है कि पिछले साल भी इसी तरह की बाढ़ ने उनकी फसलों को नुकसान पहुंचाया था, जिसके बाद वे अभी तक पूरी तरह संभल नहीं पाए थे. इस साल फिर आई बाढ़ ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है. पीड़ित किसान प्रसन्नजीत देशमुख ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि जैसे हर साल इंसान का जन्मदिन आता है, वैसे ही हमारे खेतों में बाढ़ का जन्मदिन आ गया है. पिछले साल हुए नुकसान से अभी किसान उबर भी नहीं पाए थे कि इस साल फिर बाढ़ ने खेतों को तबाह कर दिया. समझ नहीं आ रहा कि क्या करें, बोलें या रोएं.
किसानों ने आरोप लगाया कि जब से समृद्धि महामार्ग का निर्माण हुआ है, तब से इलाके में नदियों के पानी का बहाव प्रभावित हुआ है और बारिश के दौरान बार-बार खेतों में बाढ़ का पानी भर जाता है. किसानों का कहना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए, ताकि हर साल होने वाले नुकसान से बचा जा सके.
प्रभावित किसानों ने सरकार से जल्द सर्वे कराकर आर्थिक मदद देने की मांग की है. किसानों का कहना है कि अगर समय पर सहायता नहीं मिली तो उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा. प्रशासन की ओर से अब तक नुकसान के आकलन और राहत को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर किसानों की नजरें टिकी हुई हैं.