Agri Export: आम, मिलेट्स और जामुन का जूस, एपीडा की मदद से दुनिया भर में उत्‍पाद बेच रहे देसी स्टार्टअप्स

Agri Export: आम, मिलेट्स और जामुन का जूस, एपीडा की मदद से दुनिया भर में उत्‍पाद बेच रहे देसी स्टार्टअप्स

एपीडा के 'भारती' प्रोग्राम के तहत भारतीय स्टार्टअप्स ने कमाल कर दिया है.सिर्फ तीन महीने में देसी स्टार्टअप्स ने बिहार के जर्दालू आम, मिलेट्स प्रोडक्ट्स और महाराष्ट्र के जामुन-अंजीर का जूस दुनिया भर के बाजारों में एक्सपोर्ट किया है. 120 घंटे की खास ट्रेनिंग और दुबई के 'गल्फूड 2026' मंच की मदद से इन स्टार्टअप्स ने अमेरिका, यूएई और न्यूजीलैंड तक अपनी धाक जमाई है, जो 2030 तक 50 अरब डॉलर के कृषि निर्यात लक्ष्य को पूरा करने में गेम-चेंजर साबित होगा.

एपीडा के 'भारती' प्रोग्राम का कमालएपीडा के 'भारती' प्रोग्राम का कमाल
क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Jun 25, 2026,
  • Updated Jun 25, 2026, 9:19 AM IST

भारत के कृषि उत्पादों (Agri-Products) को दुनिया भर के बाजारों में पहुंचाने के लिए एक बहुत बड़ी और कामयाब शुरुआत हुई है. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की संस्था एपिडा (APEDA) ने अपने खास 'भारती' प्रोग्राम के पहले बैच को पूरा कर लिया है. इस प्रोग्राम के शुरू होने के महज तीन महीनों के भीतर ही भारतीय स्टार्टअप्स के जरिए हैरान करने वाले नतीजे सामने आए हैं.दो एग्री-टेक स्टार्टअप्स ने मिलकर बिहार के मशहूर जर्दालू आम की करीब 37 मीट्रिक टन की खेप दुबई भेजी है, तो वहीं एक अन्य स्टार्टअप ने सिंगापुर में 5 मीट्रिक टन आम का सफल एक्सपोर्ट किया है.

सिर्फ आम ही नहीं, कर्नाटक के स्टार्टअप्स ने किसानों से बाजरा खरीदकर उससे बने मिलेट्स प्रोडक्ट्स को पहली बार समुद्री रास्ते से न्यूजीलैंड भेजा है. इसके अलावा, महाराष्ट्र की एक कंपनी ने अमेरिका और ब्रिटेन में अंजीर और जामुन का जूस एक्सपोर्ट किया है, जहाँ से उन्हें दोबारा बड़े ऑर्डर मिले हैं. सरकार ने साल 2030 तक कृषि निर्यात का लक्ष्य 50 अरब डॉलर पहुंचाने का सपना रखा है और स्टार्टअप्स के माध्यम से हो रहा यह एक्सपोर्ट इसमें गेम-चेंजर साबित हो रहा है.

विदेशी बाजारों में छाए भारतीय स्टार्टअप्स!

इस शानदार प्रोग्राम का हिस्सा बनने के लिए पूरे देश से 700 से ज्यादा स्टार्टअप्स ने अप्लाई किया था. कड़े मुकाबले के बाद केवल 100 बेहतरीन स्टार्टअप्स को चुना गया, जो भारत के 22 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों से आए थे. एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव ने बताया कि यह प्रोग्राम देश के युवाओं और किसानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने के लिए शुरू किया गया है.

इनमें से 68 स्टार्टअप्स खेती और खाने-पीने की चीजें तैयार करते हैं, 26 स्टार्टअप्स एक्सपोर्ट से जुड़ी टेक्नोलॉजी देते हैं, और 6 स्टार्टअप्स क्वालिटी चेक व पैकेजिंग संभालते हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस प्रोग्राम में भाग लेने वाले कारोबारियों की उम्र 17 साल से लेकर 75 साल तक की है. इससे साफ पता चलता है कि भारत में एग्री-बिजनेस को लेकर हर उम्र के लोगों में कितना जबरदस्त उत्साह है.

देसी स्वाद की ग्लोबल उड़ान

चुने गए इन 100 स्टार्टअप्स को एक्सपोर्ट बिजनेस में माहिर बनाने के लिए 120 घंटों की एक बहुत ही खास और मजबूत ट्रेनिंग दी गई. इस ट्रेनिंग में उन्हें सुरक्षित पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विदेशी बाजारों तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय नियमों को समझने के तरीके सिखाए गए.

इतना ही नहीं, एपिडा ने इस बैच के टॉप 8 स्टार्टअप्स को दुबई के 'गल्फूड 2026' फेयर में भाग लेने का मौका दिया. वहां इन भारतीय स्टार्टअप्स ने दुनिया भर के खरीदारों से 100 से ज्यादा बिजनेस मीटिंग्स की. एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव ने बताया कि यह प्रोग्राम देश के युवाओं और किसानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने के लिए शुरू किया गया है.

एपीडा के 'भारती' प्रोग्राम का कमाल

भारतीय कृषि उत्पादों की सफलता की कहानी यहीं नहीं रुकती. मध्य प्रदेश के एक स्टार्टअप ने यूएई (UAE) की एक बहुत बड़ी सुपरमार्केट चेन के साथ ऑर्गेनिक दालों का समझौता किया है. वहीं, कर्नाटक के एक स्टार्टअप ने, जो 1,600 से अधिक किसानों से जुड़ा है, यूएई और यूरोपीय देशों में 40 मीट्रिक टन से ज्यादा पारंपरिक इंद्रायणी चावल और ऑर्गेनिक सामान भेजा है.

केरल के एक स्टार्टअप को ओमान से मिलेट्स के ऑर्डर मिले हैं, जबकि जापान और कैमरून जैसे देशों के साथ भी नए सौदों की बातचीत चल रही है. इन शानदार नतीजों को देखते हुए एपिडा बहुत जल्द 'भारती' प्रोग्राम का दूसरा बैच शुरू करने जा रहा है.

MORE NEWS

Read more!