अल नीनो का खरीफ फसलों पर कितना पड़ेगा असर? बुवाई के बाद बढ़ी किसानों की चिंता

अल नीनो का खरीफ फसलों पर कितना पड़ेगा असर? बुवाई के बाद बढ़ी किसानों की चिंता

अल नीनो और कमजोर मॉनसून का खरीफ फसलों पर क्या असर पड़ सकता है? CropLife India ने बताया कि अनिश्चित बारिश, कीटों और फसल रोगों का खतरा किसानों की चिंता बढ़ा सकता है. जानिए 119 लाख हेक्टेयर में हुई खरीफ बुवाई, IMD के मॉनसून अनुमान और विशेषज्ञों की सलाह से जुड़ी पूरी जानकारी.

Advertisement
अल नीनो का खरीफ फसलों पर कितना पड़ेगा असर? बुवाई के बाद बढ़ी किसानों की चिंताअल नीनो संकट (AI Image)

देश के कई हिस्सों में खरीफ फसलों की बुवाई तेजी से पूरी हो चुकी है. अब किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर मॉनसून कमजोर रहा या बारिश समय पर नहीं हुई तो फसलों का क्या होगा. इसी बीच फसल संरक्षण कंपनियों के बड़े संगठन CropLife India ने अल नीनो (El Niño), कमजोर मॉनसून और फसलों पर पड़ने वाले उसके असर को लेकर अहम जानकारी साझा की है. संगठन का कहना है कि अब सवाल सिर्फ मौसम का अनुमान लगाने का नहीं है, बल्कि उन फसलों की सुरक्षा का है जो पहले ही खेतों में बोई जा चुकी हैं और बढ़ना शुरू कर चुकी हैं.

119 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में हो चुकी है खरीफ की बुवाई

CropLife India के अनुसार, देश में खरीफ सीजन की बुवाई 119 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में हो चुकी है. ऐसे में अब मौसम में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव सीधे खेतों में खड़ी फसलों को प्रभावित कर सकता है. यदि बारिश समय पर नहीं होती या बहुत असमान रूप से होती है, तो फसलों की शुरुआती बढ़वार कमजोर पड़ सकती है. यही कारण है कि अब किसानों को मौसम के साथ-साथ फसल की लगातार निगरानी करने की जरूरत होगी. 

कमजोर मॉनसून वाले जिलों पर सरकार की खास नजर

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस साल मॉनसून की कुल बारिश को लंबी अवधि के औसत (LPA) का लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. वहीं केंद्र सरकार ने देश के 315 जिलों को ऐसे क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया है, जहां कमजोर मॉनसून का खतरा अधिक है. इनमें से 111 जिले ऐसे हैं, जहां सिंचाई की सुविधा काफी कम है.

इन जिलों में यदि बारिश देर से होती है या जरूरत के मुताबिक नहीं होती, तो फसल की जड़ें मजबूत नहीं बन पातीं. इसके साथ ही कीट और बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे हालात में यदि समय रहते पहचान और बचाव नहीं किया गया, तो किसानों की पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है.

अल नीनो क्या है और क्यों बढ़ जाती है चिंता?

अल नीनो (El Niño) एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर के पानी के सामान्य से अधिक गर्म होने पर विकसित होती है. इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है. भारत में भी कई बार अल नीनो के दौरान मॉनसून कमजोर पड़ जाता है या बारिश का वितरण असमान हो जाता है. हालांकि हर अल नीनो का असर एक जैसा नहीं होता, लेकिन यह किसानों के लिए चिंता का विषय जरूर बन जाता है.

वैज्ञानिक रिसर्च में क्या सामने आया?

CropLife India ने बताया कि इस विषय पर अभी भी वैज्ञानिक अध्ययन जारी हैं. संगठन ने 2025 में Nature Food पत्रिका में प्रकाशित एक शोध का भी जिक्र किया है. इस अध्ययन में एशिया की धान उत्पादन प्रणाली का विश्लेषण किया गया था. शोध के अनुसार, चीन में अल नीनो से जुड़ी पैदावार में कमी का एक कारण कीट और फसलों में बढ़ी बीमारियां भी थीं.

हालांकि संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अध्ययन चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया की परिस्थितियों पर आधारित था. इसलिए इसके नतीजों को सीधे भारतीय खेती पर लागू नहीं किया जा सकता. फिर भी यह अध्ययन यह जरूर बताता है कि बदलते मौसम और कीटों के बढ़ते खतरे को अलग-अलग देखने के बजाय एक साथ समझने की जरूरत है.

किसानों को क्या करना चाहिए?

CropLife India का मानना है कि अनिश्चित मौसम के दौरान किसानों को केवल बारिश का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि खेतों की नियमित निगरानी भी करनी चाहिए. फसल की हर अवस्था पर उसकी स्थिति को देखना, समय-समय पर कीटों की जांच करना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सलाह लेना बेहद जरूरी है.

संगठन का कहना है कि जिला स्तर पर फसल सलाह, नियमित फील्ड सर्वे, कीट निगरानी और आर्थिक क्षति स्तर (Economic Threshold Level) के आधार पर सही समय पर निर्णय लेने की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए. इससे किसानों को फसल संरक्षण उत्पादों का सुरक्षित और जरूरत के अनुसार उपयोग करने में मदद मिलेगी और फसल नुकसान का खतरा भी कम होगा.

बदलते मौसम में सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम के दौर में खेती पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण होती जा रही है. ऐसे में केवल अच्छी बारिश पर निर्भर रहने के बजाय किसानों को मौसम की जानकारी, फसल की निगरानी और वैज्ञानिक सलाह को अपनाना होगा. समय रहते सही कदम उठाकर ही खरीफ फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है और बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है.

ये भी पढ़ें: 

पहले किया विरोध, अब लागू की VB-G RAM G योजना, पंजाब सरकार के फैसले पर उठे सवाल
सुंदरजा आम की विदेशों में बढ़ी मांग, UAE भेजी गई पहली खेप से किसानों को मिला 50% ज्यादा दाम

 

POST A COMMENT