
बिहार के रोहतास जिले में धान की खेती करने वाले किसान इन दिनों पानी की कमी से परेशान हैं. नहरों के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचने के कारण कई किसानों को सिंचाई करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. धान की रोपाई का समय शुरू हो चुका है और किसानों ने खेतों में बिचड़ा (धान की नर्सरी) भी तैयार कर लिया है. लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने से उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है. किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही पानी की व्यवस्था नहीं हुई तो उनकी मेहनत और फसल दोनों प्रभावित हो सकती हैं.
जानकारी के अनुसार, डेहरी इलाके की सकला रजवाहा नहर में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है. इसका सबसे अधिक असर उन किसानों पर पड़ रहा है जिनके खेत नहर के अंतिम हिस्से में स्थित हैं. नहर के किनारे रहने वाले किसान किसी तरह पानी का उपयोग कर अपनी फसलों की सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन दूर के किसानों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है. ऐसे किसानों को निजी साधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे उनका खर्च बढ़ रहा है और आर्थिक बोझ भी बढ़ता जा रहा है.
रोहतास जिले के काराकाट प्रखंड के कई गांवों के किसान इस समस्या से सबसे ज्यादा परेशान हैं. बडीहा से सकला तक जाने वाली सकला रजवाहा नहर में पानी की कमी के कारण खेत सूखे पड़े हैं. किसानों का कहना है कि धान की खेती पूरी तरह समय पर पानी मिलने पर निर्भर करती है. यदि रोपाई के समय पानी नहीं मिला तो इस साल उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है.
इस क्षेत्र की नहरों में पानी की आपूर्ति इंद्रपुरी स्थित सोन बराज से की जाती है. सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता अजय कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल नहरों में पानी भेजने के लिए लगभग 7 हजार क्यूसेक पानी उपलब्ध हुआ है. इसमें से 3 हजार क्यूसेक पानी पश्चिम संयोजन नहर में छोड़ा गया है. इसके अलावा अन्य नहरों में भी लगातार पानी पहुंचाने का काम किया जा रहा है. विभाग का कहना है कि जहां भी पानी की कमी की शिकायत है, उसे जल्द दूर करने का प्रयास किया जाएगा.
सिंचाई विभाग के अनुसार, सोन नदी में पानी की आपूर्ति के लिए दो राज्यों के साथ समझौता किया गया है. मध्य प्रदेश के बाणसागर परियोजना से एक मिलियन एकड़ फीट और उत्तर प्रदेश के रिहंद जलाशय से 2.5 मिलियन एकड़ फीट पानी मिलना तय है. विभाग का कहना है कि समझौते के अनुसार पानी की आपूर्ति की जा रही है और यदि कहीं कोई तकनीकी या वितरण संबंधी समस्या है तो उसे जल्द ठीक किया जाएगा.
रोहतास जिले को बिहार का "धान का कटोरा" कहा जाता है. यहां बड़ी संख्या में किसान धान की खेती पर निर्भर हैं. ऐसे में यदि रोपाई के समय ही सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिला तो इसका असर न केवल किसानों की आय पर पड़ेगा, बल्कि जिले के कृषि उत्पादन पर भी दिखाई देगा. किसानों का कहना है कि समय पर पानी मिलना उनके लिए सबसे बड़ी जरूरत है.
रोहतास के किसान अब प्रशासन और सिंचाई विभाग से जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं. उनका कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में नहरों के अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी पहुंचा दिया जाए, तो धान की रोपाई समय पर पूरी हो सकती है. फिलहाल किसानों की नजरें नहरों में पानी और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसी पर उनकी फसल और पूरे सीजन की सफलता निर्भर करेगी. (रंजन कुमार का इनपुट)
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