सूखे की टेंशन और मानसून की बेरुखी, कम बारिश में फसल बचाने के स्मार्ट तरीके

सूखे की टेंशन और मानसून की बेरुखी, कम बारिश में फसल बचाने के स्मार्ट तरीके

जून में मानसून की सुस्ती और कम बारिश के कारण किसानों को सूखे की मार झेलनी पड़ रही है। ऐसे संकट में फसलों को बचाने के लिए किसानों को 'स्मार्ट' बनकर ऐसी आधुनिक तकनीकें अपनानी होंगी, जो खेतों में नमी को लंबे समय तक रोक कर रख सकें. फसलों के विकास और उनके जमीन से पोषक तत्व सोखने के लिए मिट्टी में नमी का होना सबसे जरूरी है। सही नमी से कम पानी में भी शानदार पैदावार मिलती है. इसके विपरीत, अगर जमीन सूख गई तो मिट्टी सख्त हो जाएगी,पौधों की जड़ें दम तोड़ देंगी, महंगी खाद-उर्वरक बेकार हो जाएंगे और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.

कम बारिश में फसल बचाने के स्मार्ट तरीकेकम बारिश में फसल बचाने के स्मार्ट तरीके
जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Jun 27, 2026,
  • Updated Jun 27, 2026, 2:53 PM IST


इस साल जून के महीने में  देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की रफ़्तार बेहद सुस्त रही है, जिससे उम्मीद से बहुत कम बारिश दर्ज की गई है. ऐसे सूखे और पानी की भारी किल्लत के दौर में अब किसानों को 'स्मार्ट फार्मर' बनना होगा और ऐसी आधुनिक तकनीकें अपनानी होंगी जो खेतों में नमी को लंबे समय तक रोक कर रख सकें. दरअसल, मिट्टी में नमी का होना फसलों की जिंदगी के लिए सबसे जरूरी है. अगर खेत में सही नमी रहेगी, तो पौधे जमीन से जरूरी पोषक तत्व आसानी से सोख पाएंगे,फसलों का विकास तेजी से होगा और कम पानी में भी पैदावार शानदार मिलेगी. इसके उलट, अगर जमीन की नमी गायब हो गई, तो मिट्टी सख्त हो जाएगी, पौधों की जड़ें दम तोड़ देंगी, खाद-उर्वरक बेकार चले जाएंगे और पूरी लागत डूबने से किसानों को भारी माली नुकसान झेलना पड़ेगा.

पानी और लेबर की सीधी बचत वाली तकनीक

कम बारिश के इस दौर में पानी की हर एक बूंद की कीमत है, और इसमें सबसे मददगार साबित हो रहा है लेजर लैंड लेवलर। कंप्यूटर तकनीक से चलने वाला यह आधुनिक यंत्र पूरे खेत को एकदम समतल कर देता है. जब खेत पूरी तरह समतल होता है, तो सिंचाई का पानी हर कोने में बराबर पहुंचता है, जिससे करीब 25% तक पानी की सीधी बचत होती है और खाद की क्षमता भी बढ़ जाती है।इसी समतल खेत में इस बार पारंपरिक रोपाई के बजाय धान की सीधी बुआई ( Direct Seeded Rice) तकनीक अपनाने की पुरजोर हिदायत दी जा रही है.डीएसआर तकनीक से धान लगाने पर न तो नर्सरी तैयार करने का झंझट होता है और न ही खेत में पानी भरकर कीचड़ करना पड़ता है. इससे सीधे मुख्य खेत में बीज बोया जाता है, जिससे लगभग 30% से 40% तक पानी और करीब 5000-6000 रुपये प्रति हेक्टेयर की लागत बचती है.

कम बारिश में भी नहीं सूखेगी फसल 

सिर्फ धान ही नहीं, बल्कि खरीफ की दूसरी प्रमुख फसलों जैसे सोयाबीन, मक्का, अरहर, मूंग और मूंगफली के लिए रेज्ड बेड प्लांटर तकनीक इस मौसम में किसी वरदान से कम नहीं है. इस मशीन से बुआई करने पर खेत में उठी हुई मेढ़ यानि बेड बनती है और हर दो कतारों के बीच 25-30 सेंटीमीटर चौड़ी नाली या कूड़ बन जाता है. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सूखे और अत्यधिक बारिश, दोनों ही विपरीत हालातों से फसल की हिफाजत करती है.

अगर सूखा पड़ता है या कम बारिश होती है, तो इन नालियों के अंतिम छोर को बंद करके पानी को रोका जा सकता है, जिससे नमी लंबे समय तक बरकरार रहती है. इसके विपरीत, अगर अचानक मूसलाधार बारिश हो जाए और खेत में पानी भर जाए, तो नालियों के छोर खोलकर फालतू पानी को आसानी से बाहर निकाला जा सकता है, जिससे फसलों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहती है.

फसलों के लिए सुरक्षा कवच, 

खेतों से पानी को भाप बनकर उड़ने से रोकने का सबसे अचूक और आजमाया हुआ नुस्खा है मल्चिंग तकनीक। आज के दौर में यह तकनीक खास तौर पर सब्जियों, फलों और बागवानी की फसलों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही है. मल्चिंग दो तरीके से की जा सकती है—पहली पारंपरिक देशी मल्चिंग, जिसमें फसल के बचे हुए अवशेषों, सूखी घास या पुआल से पौधों के आस-पास की जमीन को ढक दिया जाता है. दूसरी आधुनिक प्लास्टिक मल्चिंग, जिसमें बाजार में मिलने वाली रंग-बिरंगी प्लास्टिक शीट्स से जमीन को कवर किया जाता है.

प्लास्टिक मल्चिंग लगाने में प्रति एकड़ लगभग 8 से 12 हजार रुपये की लागत आती है, लेकिन इसके फायदे लाजवाब हैं. यह जमीन में देर तक नमी बनाए रखती है जिससे बार-बार सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती, मिट्टी का कटाव रुकता है और सबसे बड़ी बात—खेत में खरपतवार उगने का नाम नहीं लेता, जिससे फसल की क्वालिटी और पैदावार दोनों बेहतरीन हो जाती है.

स्मार्ट फार्मिंग से मिलेगी पैदावार 

बदलते दौर और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में अब खेती के पुराने ढर्रे को छोड़ना ही समझदारी है. जून की इस भयंकर गर्मी और मानसून की बेरुखी ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले वक्त में वही किसान कामयाब होगा जो वक्त रहते अपनी रणनीति बदलेगा. लेजर लेवलर से खेत को समतल करना, धान की सीधी बुआई (DSR) अपनाना,

खरीफ फसलों को मेढ़ पर बोना और बागवानी में मल्चिंग का इस्तेमाल करना—ये केवल खेती के तरीके नहीं, बल्कि आज के समय में किसानों के सबसे बड़े सुरक्षा कवच हैं. इन स्मार्ट कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक सुझावों को अपनाकर किसान  न सिर्फ पानी के इस भीषण संकट से पार पा सकते हैं, बल्कि खेती की लागत को आधी करके अपनी जेब और मुनाफ़ा दोनों बढ़ा सकते हैं.


 

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