
फरवरी माह में, जिसे आप माघ-फाल्गुन कहते हैं, बसंत पंचमी का त्योहार आता है. इस महीने से ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है. इस महीने तक आपकी दलहनी और तिलहनी फसलें, आलू और कई अन्य सब्जियां भी तैयार होने लगती हैं और इस समय आप कुछ हद तक फसल की पैदावार का अनुमान लगा सकते हैं. ऐसे में कुछ महत्वपूर्ण कृषि कार्य हैं जो किसान इस महीने में करते हैं. आइए जानते हैं कौन से हैं वो कृषि कार्य.
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सूरजमुखी की फसल नकदी फसलों में से एक है. यह सबसे अधिक लाभदायक फसलों में से एक है. सूरजमुखी की फसल 15 फरवरी तक लगाई जा सकती है. इस फसल को बोते समय इसके बीजों को पक्षियों से बचाना बहुत जरूरी है क्योंकि पक्षी बीज निकाल लेते हैं. खुद को उनसे बचाने के लिए शोर मचाएं. सूरजमुखी की बुआई के लिए मार्डन किस्म बहुत लोकप्रिय है. इसके अलावा इसकी संकर किस्में भी बोई जा सकती हैं. इनमें बीएसएस-1, केबीएसएस-1, ज्वालामुखी, एमएसएफएच-19, सूर्या आदि शामिल हैं. इसकी बुआई से पहले यदि खेत में पर्याप्त नमी न हो तो पाटा चलाकर जुताई करनी चाहिए. पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद सामान्य हल से 2-3 बार जुताई करके खेत को भुरभुरा बना लेना चाहिए या रोटावेटर का उपयोग करना चाहिए.
इसकी बुआई करते समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी 4-5 सेमी तथा पौधे से पौधे की दूरी 25-30 सेमी रखनी चाहिए. बुआई से पहले खेत की तैयारी के समय 7-8 टन प्रति हेक्टेयर की दर से सड़ी हुई गोबर की खाद भूमि में मिला दें तथा अच्छी उपज के लिए सिंचित अवस्था में 130 से 160 किलोग्राम यूरिया, 375 किलोग्राम एसएसपी तथा 66 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर डालें. हेक्टेयर. दर पर उपयोग करें. नाइट्रोजन की 2/3 मात्रा तथा फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा बुआई के समय प्रयोग करें तथा नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा बुआई के 30-35 दिन बाद पहली सिंचाई के समय खड़ी फसल में देना लाभकारी पाया गया है.