
महाराष्ट्र के कई जिलों में पिछले कुछ दिनों से बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज़ हवाओं के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. शुक्रवार को अधिकारियों ने बताया कि 1.22 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर फसलों के नुकसान की रिपोर्ट मिली है. अधिकारियों ने बताया कि उत्तरी महाराष्ट्र के नासिक संभाग में बारिश से जुड़ी घटनाओं में दो लोगों की मौत की खबर है, जिसके बाद राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि सरकार प्रभावित किसानों को मुआवजा देगी. उन्होंने यह भी बताया कि नुकसान का आकलन करने के लिए कई इलाकों में सर्वे चल रहा है.
राज्य के कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उत्तरी महाराष्ट्र और पश्चिमी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ हिस्सों में इसका असर सबसे ज़्यादा रहा है, जिससे 82,000 से ज़्यादा किसान प्रभावित हुए हैं. राजस्व विभाग के सूत्रों ने बताया कि सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में नासिक, अहिल्यानगर, जलगांव, धुले, बुलढाणा और छत्रपति संभाजीनगर शामिल हैं. इन जिलों में खेतों में खड़ी और कटी हुई रबी की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है.
उन्होंने बताया कि गेहूं, चना, ज्वार और बाजरा जैसी कटाई के लिए तैयार फसलें कई जगहों पर जमीन पर गिर गई हैं, जबकि अंगूर, अनार और आम जैसे फलों के बागों में भारी मात्रा में फल गिर गए हैं. सूत्रों ने बताया कि प्याज, टमाटर और मिर्च जैसी सब्जियों को भी नुकसान पहुंचा है, और कई खेतों में पानी भर जाने की भी खबर है.
राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि मार्च के आखिरी हफ़्ते में बेमौसम बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. 1.22 लाख हेक्टेयर से ज़्यादा जमीन पर फसलें प्रभावित हुई हैं. जिसमें केला, गेहूं, मक्का, चना, आम, ज्वार, तरबूज और सब्जियां उन फसलों में शामिल हैं जिन्हें सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है.
इस बीच, बारामती लोकसभा सांसद और NCP (SP) की नेता सुप्रिया सुले ने भी इस पर चिंता जाहिर की और कहा कि सरकार के लिए यह जरूरी है कि वह प्रभावित किसानों को आर्थिक मदद दें. उन्होंने कहा कि बारामती लोकसभा क्षेत्र के साथ-साथ पूरे पुणे जिले और आस-पास के इलाकों में ओलावृष्टि और भारी बारिश हुई है. इससे रोजमर्रा का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. ग्रामीण इलाकों में फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है. सुप्रिया सुले ने आगे कहा कि कटी हुई गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है, जबकि दालें, मक्का, बाजरा, ज्वार, प्याज, केले, बैंगन, तरबूज और अन्य फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है.
अधिकारियों ने बताया कि पुणे जिले के आंबेगांव तालुका में भी गुरुवार दोपहर को तेज हवाओं और बिजली कड़कने के साथ भारी बारिश हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया और खेती की पैदावार के साथ-साथ ईंट भट्ठों को भी नुकसान पहुंचा. उन्होंने बताया कि कलम, अवसरी, लौकी और चांदोली जैसे गांवों में भारी बारिश हुई, जबकि पुणे-नासिक हाईवे पर जलभराव के कारण यात्रियों को आवाजाही में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
इस इलाके के किसानों ने कटी हुई प्याज, आलू और चारे को बचाने के लिए फौरन कदम उठाए, जबकि अंगूर, आम और चीकू जैसी फलों की फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है. अधिकारियों ने बताया कि आम के बौर (फूल) बड़ी मात्रा में झड़ गए हैं, जिससे इस साल होने वाली पैदावार पर बुरा असर पड़ेगा.
अधिकारियों ने बताया कि अकेले उत्तरी महाराष्ट्र में ही करीब 64,000 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई है, जिसमें से 50,000 हेक्टेयर से ज्यादा फसल नासिक संभाग में खराब हुई है. उन्होंने आगे बताया कि धुले जिले में 8,000 हेक्टेयर से ज्यादा फसल प्रभावित हुई है, जबकि सोलापुर और उसके आस-पास के इलाकों में ओलावृष्टि के कारण नुकसान हुआ है. इस बीच, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले तीन से चार दिनों में और अधिक भारी बारिश, तेज हवाएं चलने और ओलावृष्टि होने की संभावना जताते हुए चेतावनी जारी की है. (PTI)