पंजाब में ओलावृष्टि की आशंका से चिंतित किसान, गेहूं की फसल पर मंडरा रहा खतरा

पंजाब में ओलावृष्टि की आशंका से चिंतित किसान, गेहूं की फसल पर मंडरा रहा खतरा

पंजाब के किसान इस समय चिंतित हैं, क्योंकि 3-4 अप्रैल को एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर राज्य में देखने को मिलेगा. मौसम में हो रही बदलाव की वजह से हवा और मौसम अचानक अस्थिर हो सकते हैं, जिससे खेतों में खड़ी या कटने वाली गेहूं फसलों को नुकसान होने का खतरा बढ़ गया है.

ओलावृष्टि की आशंका से चिंतित किसान (AI- तस्वीर)ओलावृष्टि की आशंका से चिंतित किसान (AI- तस्वीर)
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 03, 2026,
  • Updated Apr 03, 2026, 3:47 PM IST

देश में लगातार हो रहे मौसम से पंजाब के किसान इस समय चिंतित हैं, क्योंकि 3-4 अप्रैल को एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर राज्य में देखने को मिलेगा. दरअसल, इस दौरान भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बारिश, तेज हवा, गरज-चमक और ओलावृष्टि की चेतावनी दी है. आमतौर पर ऐसी बारिश सर्दियों में फायदेमंद होती है, लेकिन अभी रबी फसल कटाई का समय है, इसलिए यह किसानों के लिए परेशानी बन सकती है. मौसम में हो रही बदलाव की वजह से हवा और मौसम अचानक अस्थिर हो सकते हैं, जिससे खेतों में खड़ी या कटने वाली गेहूं फसलों को नुकसान होने का खतरा बढ़ गया है.

बारिश से गेहूं की फसल पर पड़ेगा असर

राज्य में 34 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर बोई गई गेहूं की फसल अब कटाई के लिए तैयार है. ऐसे में अगर तेज हवा या बारिश हो जाती है, तो थोड़ी सी भी खराब मौसम फसल को नुकसान पहुंचा सकता है और अनाज की क्वालिटी भी खराब हो सकती है. सरकार ने बताया है कि गेहूं खरीद का सीजन 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है और इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है. लेकिन मंडियों में आढ़तियों की हड़ताल की वजह से गेहूं की खरीद नहीं हो रही है. बता दें कि राज्य में 1,897 से ज्यादा खरीद केंद्र बनाए गए हैं, जहां किसानों की फसल खरीदी जाएगी. वहीं, सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है.

बारिश से करीब 35,000 एकड़ फसल प्रभावित

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, तेज हवाओं से फसल के पौधे गिर सकते हैं. वहीं, बारिश और ओले पड़ने से फसल का रंग खराब हो जाता है, जिससे उसकी कीमत कम मिलती है. हाल ही में हुए खराब मौसम ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है. 30-31 मार्च को आए तूफान से कई जिलों में फसल को नुकसान हुआ था, जिसमें कुछ जगहों पर 15-20 फीसदी तक फसल खराब हो गई. वहीं, सिर्फ मुक्तसर जिले में ही करीब 35,000 एकड़ फसल प्रभावित हुई है.

7 से 9 अप्रैल के बीच पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना

किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि बार-बार खराब मौसम, फसलों के गिरते दाम और कम पैदावार की वजह से किसान पहले ही आर्थिक संकट में हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आगे फिर बारिश हुई, तो गांवों की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हो सकता है. चिंता की बात ये भी है कि 7 से 9 अप्रैल के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना है, जिससे खड़ी फसलों पर खतरा और बढ़ सकता है.

तेज हवाओं से हो सकता है भारी नुकसान

वहीं, कृषि विभाग के पूर्व अधिकारी बलदेव सिंह नौरथ ने कहा कि ऐसी स्थिति में किसान ज्यादा कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि यह प्राकृतिक आपदा है और इससे स्थानीय स्तर पर नुकसान होता है. उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास भगवान से प्रार्थना करने के अलावा कोई चारा नहीं है. फसलें कटाई के लिए तैयार हैं और ओलावृष्टि, तेज हवाओं से भारी नुकसान हो सकता है. जैसा कि हमने पिछली पश्चिमी विक्षोभ के दौरान देखा था, जो अपेक्षाकृत हल्का था, लेकिन वर्तमान प्रणाली अधिक शक्तिशाली है और संभावित रूप से अधिक नुकसान पहुंचा सकती है.

जलवायु परिवर्तन और कृषि मौसम विज्ञान विभाग की प्रमुख पवनीत कौर किंगरा ने किसानों को मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए खेतों की सिंचाई से बचने की सलाह दी है. इस बीच, बागवानी विभाग के उप निदेशक संदीप ग्रेवाल ने कहा कि कुछ छिटपुट क्षेत्रों को छोड़कर, फल और सब्जियों की फसलों को अब तक कोई महत्वपूर्ण नुकसान नहीं हुआ है.

किसानों को क्या करना चाहिए?

सिंचाई तुरंत बंद करें
कीटनाशकों/उर्वरकों का छिड़काव करने से बचें
पूरी तरह से पकी हुई फसलों की कटाई बिना देर किए करें
कटाई के बाद बचे हुए उत्पाद को ढक कर सुरक्षित स्थान पर रखें
खेतों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करें
आंधी-तूफान के दौरान पशुओं को घर के अंदर रखें

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