हिसार में ओलावृष्टि से किसानों की फसलें तबाह, 50 हजार प्रति एकड़ मुआवजे की मांग

हिसार में ओलावृष्टि से किसानों की फसलें तबाह, 50 हजार प्रति एकड़ मुआवजे की मांग

हरियाणा के हिसार और आसपास के जिलों में हाल ही में हुई ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों और चने की फसलें बुरी तरह खराब हुई हैं. किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत बर्बाद हो गई है और वे सरकार से प्रति एकड़ 50 हजार रुपये मुआवजे की मांग कर रहे हैं. इससे किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी.

ओलावृष्टि से किसानों की फसल बर्बादओलावृष्टि से किसानों की फसल बर्बाद
प्रवीण कुमार
  • Hisar,
  • Apr 02, 2026,
  • Updated Apr 02, 2026, 11:34 AM IST

हरियाणा के हिसार जिले और आसपास के सात जिलों में हाल ही में हुई ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. गेहूं, सरसों और चने की फसलें भारी नुकसान झेल रही हैं. किसानों का कहना है कि मौसम की अचानक मार से उनकी फसलें नष्ट हो गई हैं और अब उन्हें सरकार से उचित मुआवजा मिलना चाहिए. किसान 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजे की मांग कर रहे हैं.

ओलावृष्टि का कहर, फसल बुरी तरह बर्बाद

हिसार, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, मेवात, पलवल, फतेहाबाद और सिरसा जिलों में ओलों और तेज हवाओं ने फसलों को बुरी तरह नुकसान पहुँचाया है. हिसार में ही गेहूं की लगभग 50 प्रतिशत फसल और सरसों की पिचहर प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई है. ओले इतने बड़े और तेज थे कि सरसों की फली टूट गई और बीज बिखर गए. इसके अलावा सब्जियों और बागवानी की फसलें भी प्रभावित हुई हैं.

तीस से अधिक गांवों में किसानों की मेहनत पर मौसम की मार पड़ी है. इनमें बंगला, मात्रश्याम, कीर्तन, सीसवाली, खारिया, डोभी कुतिया वाली, शाहपुर, सातरोड खुर्द, कमारी, टोकस पातल, खरकड़ी, निशाना, मिगनी खेडा, खरका, राजली पंघाल, ढाणी खान बहादुर और मीरदाद गांव शामिल हैं.

गेहूं और सरसों की फसल बर्बाद

किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि से उनकी गेहूं और सरसों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. सरसों की फसल निकालने का समय था, लेकिन ओलों के गिरने से फली टूट गई और बीज बिखर गए. इससे किसानों का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है.

हिसार के शमशेर और सुरेंद्र जैसे किसान बताते हैं कि उनके बगला गांव में गेहूं, सरसों और सब्जियों की फसलें पूरी तरह खराब हो गई हैं. उनका कहना है कि सरकार को तुरंत गिरदावरी कराकर मुआवजा देना चाहिए.

किसान कर रहे मुआवजे की मांग

किसानों का यह भी कहना है कि सरकार द्वारा हर क्षेत्र में फसल नुकसान का जायजा लेकर उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए. हिसार जिले में लगभग 4.51 लाख एकड़ में गेहूं और 2.20 लाख एकड़ में सरसों की फसल लगी हुई है. इसमें से 40 से 50 प्रतिशत सरसों और पिचहर प्रतिशत गेहूं की फसल खराब हो चुकी है.

किसानों की माने तो यदि समय पर मुआवजा नहीं मिला तो उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है. उनका कहना है कि यह राहत उन्हें भविष्य में फसल बोने और खेती को जारी रखने में मदद करेगी.

सरकार और मौसम विभाग की भूमिका

मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी की थी कि कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि और तेज हवाओं की संभावना है. लेकिन अचानक आई यह आपदा किसानों के लिए बहुत बड़ा झटका साबित हुई. अब किसानों की उम्मीद सरकार से है कि वे जल्द से जल्द फसल नुकसान का आंकलन करें और मुआवजा राशि निर्धारित करें.

किसानों के लिए जरूरी सलाह

किसानों का यह भी कहना है कि भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए उन्हें उचित बीमा योजना और सरकारी मदद की आवश्यकता है. इस तरह की घटनाओं से किसानों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. समय पर राहत और मुआवजा न मिलने पर कई छोटे किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं.

हिसार और अन्य प्रभावित जिलों में ओलावृष्टि ने किसानों की फसलें बर्बाद कर दी हैं. गेहूं, सरसों और चने के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. अब किसानों की नजरें हरियाणा सरकार पर हैं कि वे जल्द से जल्द गिरदावरी कर मुआवजा राशि का निर्धारण करें. 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग किसानों की अपेक्षा है ताकि उनकी मेहनत व्यर्थ न जाए और वे खेती जारी रख सकें.

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