Cotton Area: जीरो ड्यूटी ने बिगाड़ा कपास का खेल! बुवाई में भारी गिरावट

Cotton Area: जीरो ड्यूटी ने बिगाड़ा कपास का खेल! बुवाई में भारी गिरावट

देश में कपास की बुवाई इस बार शुरुआती दौर में ही दबाव में दिख रही है. 12 जून 2026 तक कपास का रकबा 9.53 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 13.19 लाख हेक्टेयर के मुकाबले करीब 28 प्रतिशत कम है. किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा कपास आयात पर 11 प्रतिशत ड्यूटी हटाने से नई फसल के समय कीमतों पर दबाव बढ़ने का डर पैदा हुआ है.

Cotton Sowing Area DeclineCotton Sowing Area Decline
प्रतीक जैन
  • Noida,
  • Jun 17, 2026,
  • Updated Jun 17, 2026, 4:48 PM IST

इस साल कपास की बुवाई पर केंद्र सरकार की आयात नीति का असर साफ दिखने लगा है. 12 जून 2026 तक देश में सिर्फ 9.53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 13.19 लाख हेक्टेयर था. यानी शुरुआती चरण में करीब 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. दरअसल, केंद्र सरकार ने 1 जून 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक कपास आयात पर लगने वाली 11 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी हटा दी है, जिससे विदेश कपास के सस्‍ते आयात का रास्‍ता खुल गया है. यानी नई घरेलू फसल बाजार में आने से पहले विदेशी कपास सस्ते दाम पर मिलर्स और टेक्सटाइल कंपनियों तक पहुंचेगा. ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब उनकी फसल मंडी पहुंचेगी तो क्या उसके लिए बाजार और सही दाम दोनों बचेंगे?

पिछले साल भी किसानों को लगा था झटका

एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि किसानों की यह चिंता सिर्फ आशंका नहीं, बल्‍कि पिछले सीजन का अनुभव भी है. बीते साल सरकार ने अगस्त के आखिर में कपास आयात पर शुल्क हटाया था और कुछ ही दिनों में घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ गया था. कई इलाकों में कपास के भाव 10-12 प्रतिशत तक टूट गए थे और किसानों को MSP तक हासिल नहीं हो पाया. इस बार वही स्थिति दोहराने का डर बुवाई के फैसले में दिखाई देने लगा है.

सरकारी खरीद पर भरोसा भी कमजोर

किसानों की परेशानी सिर्फ आयात तक सीमित नहीं है. सरकारी खरीद समय पर शुरू नहीं होने की शिकायत लंबे समय से रही है. छोटे किसानों के पास भंडारण की क्षमता नहीं होती और उन्हें नकदी की जरूरत भी तुरंत होती है. ऐसे में वे मजबूरी में निजी व्यापारियों को कम दाम पर उपज बेच देते हैं. ऊपर से बेमौसम बारिश और नमी का जोखिम अलग रहता है, जिससे एमएसपी का लाभ भी नहीं मिल पाता.

मौसम की चुनौती भी फैक्‍टर

एक ओर जहां सरकारी नीति का असर तो दूसरी तरफ मौसम का असर भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता. 1 से 14 जून के बीच देश में 40.2 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य 56.1 मिमी होती है. यानी अब तक 28 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है. मध्य भारत में यह कमी 55 प्रतिशत तक पहुंच गई है. महाराष्ट्र जैसे बड़े कपास उत्पादक राज्य में भी बारिश सामान्य से काफी कमजोर रही है. 

अल नीनो और कमजोर मॉनसून की आशंका बनी हुई है, लेकिन फिलहाल शुरुआती तस्वीर यही बता रही है कि किसानों को खेत से ज्यादा बाजार की चिंता रोक रही है. अब आने वाले हफ्तों में मॉनसून की रफ्तार बढ़ने से कुछ सुधार हो सकता है, लेकिन मौजूदा संकेत बताते हैं कि कपास का रकबा पिछले साल के स्तर तक पहुंचना आसान नहीं होगा.

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