Kharif Sowing: मॉनसून की सुस्ती से दलहन फसलों पर असर, कम बारिश के चलते 43 फीसदी कम हुई बुवाई

Kharif Sowing: मॉनसून की सुस्ती से दलहन फसलों पर असर, कम बारिश के चलते 43 फीसदी कम हुई बुवाई

देश में मॉनसून की धीमी शुरुआत का असर खरीफ सीजन की दलहन फसलों पर दिखने लगा है. कृषि मंत्रालय के अनुसार 12 जून तक दलहन बुवाई पिछले साल की तुलना में 43 फीसदी कम रही. अरहर, उड़द और मूंग की बुवाई में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.

Kharif Season Sowing pulses impactedKharif Season Sowing pulses impacted
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 17, 2026,
  • Updated Jun 17, 2026, 8:40 AM IST

देश में मॉनसून की धीमी और कमजोर शुरुआत का असर खरीफ सीजन की दलहन फसलों की बुवाई पर साफ दिखने लगा है. कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 12 जून तक दालों की कुल बुवाई पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 43 फीसदी कम रही है. प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसान अभी भी पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जिससे खेती की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देशभर में 12 जून तक अरहर की बुवाई केवल 0.09 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 57 फीसदी कम है. 

वहीं, उड़द की बुवाई करीब 0.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई, जबकि पिछले साल यह 0.35 लाख हेक्टेयर थी. मूंग की बुवाई 0.69 लाख हेक्टेयर में दर्ज की गई, जो एक साल पहले के 1.54 लाख हेक्टेयर से लगभग 55 फीसदी कम है.

कर्नाटक और महाराष्ट्र के किसानों में बढ़ी चिंता

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, कलबुर्गी स्थित कर्नाटक प्रदेश रेड ग्राम ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बसवराज इंगिन ने कहा कि अब तक क्षेत्र में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है और किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे समय पर बारिश होगी या नहीं. उन्होंने बताया कि उत्तर-पूर्वी कर्नाटक के साथ-साथ महाराष्ट्र के लातूर और सोलापुर के इलाकों, तेलंगाना के कई हिस्सों में भी अरहर उत्पादक किसान इंतजार की स्थिति में हैं.

देश में बारिश सामान्य से 32 फीसदी कम

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 15 जून तक देश में सामान्य से 32 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. इस अवधि में सामान्य बारिश 62.1 मिलीमीटर मानी जाती है, जबकि वास्तविक बारिश केवल 42.4 मिलीमीटर रही. मौसम की यह स्थिति खरीफ फसलों की शुरुआती बुवाई को प्रभावित कर रही है.

लातूर और गडग में खेतों की हालत पर नजर 

लातूर के दाल कारोबारी एन कलंत्री ने कहा कि इलाके में अब तक बारिश नहीं पहुंची है और अरहर की बुवाई शुरू ही नहीं हो सकी है. वहीं, गदग के मिलर सुजय हुबली ने बताया कि जिन क्षेत्रों में पहले हल्की बारिश हुई थी वहां कुछ किसानों ने मूंग बोई है, लेकिन अब फसल को आगे बढ़ाने के लिए नई बारिश की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि गडग और यादगिर के कुछ इलाकों में बुवाई हुई जरूर है, लेकिन किसान अगली बारिश का इंतजार कर रहे हैं. बसवराज इंगिन ने कहा कि कलबुर्गी के कुछ हिस्सों में पहले हुई बारिश के बाद किसानों ने मूंग की बुवाई कर दी थी, लेकिन अब उस शुरुआती फसल को भी नमी की जरूरत है. उन्होंने सरकार से समय रहते राहत और सहायता की तैयारी शुरू करने की मांग की.

अल नीनो को लेकर भी बढ़ी चिंता

इधर, इंडिया पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के मानद सचिव सतीश उपाध्याय ने कहा कि फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि बारिश को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे प्रमुख दाल उत्पादक राज्यों के लिए अल नीनो चिंता का विषय बन सकता है. 

हालांकि, अरहर और उड़द जैसी फसलों की बुवाई मध्य जुलाई तक संभव रहती है, लेकिन देरी से बुवाई होने पर उत्पादन चक्र प्रभावित हो सकता है. सतीश उपाध्याय ने कहा कि सरकार के पास इस समय करीब 43 से 45 लाख टन दालों का बफर स्टॉक उपलब्ध है. अगर मौसम की स्थिति ज्‍यादा नहीं बिगड़ती है तो यह भंडार बाजार में कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद कर सकता है.

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