
तेलंगाना सरकार ने राज्य में ऐसी धान किस्मों की खेती को प्रोत्साहित करने का फैसला लिया है, जिनकी बाजार में मजबूत मांग है और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना है. कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने सरकार को आठ ऐसी धान किस्मों की जानकारी दी है, जो किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती हैं. इस लिस्ट में BPT 5204, तेलंगाना सोना (RNR 15048), KNM-1638, जय श्री राम, HMT, WGL 962, WGL 44 और JGL 1798 शामिल हैं.
उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का की अध्यक्षता वाली कैबिनेट उप-समिति ने किसानों के बीच इन किस्मों को लेकर जागरूकता बढ़ाने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को बाजार की मांग से जोड़ने के लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान तैयार कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक, इन धान किस्मों से तैयार होने वाले चावल की मांग अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप जैसे देशों में लगातार बनी हुई है. ऐसे में बड़े स्तर पर खेती बढ़ने से किसानों को निर्यात बाजार का लाभ भी मिल सकता है.
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि इन प्रीमियम धान किस्मों के बीज बाजार में पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं. इससे किसानों को नई किस्मों की खेती अपनाने में किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में कुछ धान किस्मों की बाजार में मांग कमजोर है और मिलिंग के दौरान उनके टूटने की शिकायत भी सामने आती है. अधिकारियों ने सुझाव दिया कि भविष्य की खरीद नीति को बाजार की जरूरत और केंद्र सरकार की व्यवस्था के अनुरूप बनाया जाए.
इधर, मॉनसून को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में साफ कहा कि बारिश के दौरान लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए और लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. हालिया भारी बारिश के दौरान हैदराबाद और साइबराबाद के कई इलाकों में लगे जाम और लोगों को हुई दिक्कतों पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई.
उन्होंने कहा कि मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद समय रहते लोगों को सतर्क नहीं किया गया और विभागों के बीच तालमेल की कमी दिखाई दी. सरकार ने नगर प्रशासन, पुलिस, ट्रैफिक, HYDRAA, जल बोर्ड और बिजली विभाग को मैदान में सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं. साथ ही जलभराव वाले इलाकों, दुर्घटना संभावित स्थानों और ट्रैफिक प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर पहले से तैयारी करने को कहा गया है. (पीटीआई)