महाराष्ट्र में 15 दिनों में सिर्फ 26 प्रतिशत बारिश हुई, किसानों को बुवाई में जल्दबाजी से बचने की सलाह

महाराष्ट्र में 15 दिनों में सिर्फ 26 प्रतिशत बारिश हुई, किसानों को बुवाई में जल्दबाजी से बचने की सलाह

महाराष्ट्र में जून के शुरुआती दिनों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है. इसे देखते हुए सरकार ने किसानों को फिलहाल बुवाई शुरू नहीं करने की सलाह दी है. प्रशासन का कहना है कि पर्याप्त बारिश होने के बाद ही खेती का काम आगे बढ़ाना बेहतर होगा.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 16, 2026,
  • Updated Jun 16, 2026, 4:47 PM IST

महाराष्ट्र में जून के शुरुआती 15 दिनों में मॉनसून की रफ्तार उम्मीद से काफी कमजोर रही है. राज्य को इस अवधि में सामान्य बारिश का केवल 26 प्रतिशत हिस्सा ही मिला, जिससे खेती की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. कम बारि‍श को देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों को फिलहाल बुवाई शुरू करने में जल्दबाजी नहीं करने की सलाह दी है. प्रशासन ने कहा है कि कि पर्याप्त नमी के बिना बुवाई करने पर फसलों को नुकसान हो सकता है और दोबारा लागत बढ़ सकती है.

18 जून के बाद बढ़ेगी बारिश!

कई इलाकों में कृषि गतिविधियां जारी हैं. धान और रागी की नर्सरी तैयार करने के साथ खेतों की पूर्व तैयारी का काम चल रहा है, ताकि बारिश की स्थिति सुधरते ही बुआई शुरू की जा सके. मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, कोंकण और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में फिलहाल हल्की और बिखरी हुई बारिश जारी रह सकती है. वहीं, विदर्भ और मराठवाड़ा में 18 जून के बाद बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है.

विदर्भ में गर्मी भी बनी चिंता

बारिश की कमी के बीच विदर्भ के कुछ हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक लू जैसे हालात बने रहने की आशंका है. इससे खेतों में नमी और जल उपलब्धता दोनों प्रभावित हो सकती हैं. राज्य मंत्रिमंडल ने मानसून में देरी और जल भंडार में कमी को लेकर चिंता जताई है. राज्‍य सरकार ने पानी के विवेकपूर्ण इस्‍तेमाल पर जोर देते हुए प्रशासन और किसानों दोनों को सतर्क रहने का संदेश दिया.

ग्रामीण पेयजल नीति 2026 को दी मंजूरी

राज्य सरकार ने ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है. कैबिनेट ने ग्रामीण पेयजल नीति 2026 को मंजूरी दी है, जिसके तहत गांवों में लंबे समय तक टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना तैयार की गई है. सरकार का जोर केवल पानी पहुंचाने पर नहीं, बल्कि जल प्रबंधन को स्थायी मॉडल से जोड़ने पर रहेगा.

नई नीति के तहत अलग-अलग पेयजल योजनाओं को आपस में जोड़ने, ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ और सुरक्षित पानी पहुंचाने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक ढांचा विकसित करने की तैयारी है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की कमी से जुड़ी चुनौतियों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आएगी.

वहीं, राज्य सरकार ने महाराष्ट्र अनमैन्ड सिस्टम्स पॉलिसी 2026 को भी मंजूरी दी है. इसका उद्देश्य ड्रोन और रोबोटिक तकनीक के निर्माण, रिसर्च, स्किल डेवलपमेंट और औद्योगिक और कृषि उपयोग को बढ़ावा देना है. सरकार जोखिम वाले क्षेत्रों में भी ऐसी तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित करना चाहती है.

जी-रामजी कानून के अनुरूप रोजगार गारंटी व्यवस्था में बदलाव

कैबिनेट ने महाराष्ट्र रोजगार गारंटी अधिनियम 1977 में संशोधन को भी मंजूरी दी है. यह बदलाव विकसित भारत-जी रामजी अधिनियम 2025 के प्रावधानों के अनुरूप किए जाएंगे. सरकार इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अध्यादेश लाने की तैयारी कर रही है ताकि योजना का लाभ जमीनी स्तर तक अधिक व्यवस्थित तरीके से पहुंच सके.

बैठक में नागपुर में हाई एनर्जी मेडिकल साइक्लोट्रॉन परियोजना को भी मंजूरी दी गई. मध्य भारत की इस विशेष परियोजना से विभिन्न बीमारियों की उन्नत जांच और उपचार सुविधाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है. इससे मरीजों को आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीक तक पहुंच आसान हो सकती है.

कैबिनेट ने भारतनेट कार्यक्रम के संशोधित क्रियान्वयन ढांचे को मंजूरी देते हुए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए विशेष कंपनी बनाने का फैसला किया. इसके अलावा स्थानीय निकायों में आरक्षित सीटों पर चुने गए प्रतिनिधियों को जाति वैधता प्रमाणपत्र जमा करने के लिए अंतिम छह महीने की अतिरिक्त राहत देने का भी निर्णय लिया गया. (पीटीआई)

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