
भारत जहां हर साल बहुत ज्यादा मात्रा में फसलें उगाई जाती हैं. इन फसलों के बाद खेतों में काफी मात्रा में पराली और बाकी बचा हुआ कचरा रह जाता है. इस कचरे को अक्सर किसान जला देते हैं या इसे यूं ही छोड़ देते हैं. लेकिन अब यही पराली और कृषि कचरा भारत के लिए एक बड़ी ताकत बन सकता है. यह सिर्फ कचरा नहीं, बल्कि ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत है.
भारत में हर साल करीब 350 मिलियन टन कृषि कचरा निकलता है. इसमें धान और गेहूं की पराली, भूसा और अन्य फसल के अवशेष शामिल होते हैं. इतनी बड़ी मात्रा में होने के बावजूद इसका सही इस्तेमाल नहीं हो पाता. अगर इस कचरे का सही उपयोग किया जाए तो यह देश के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है.
कई राज्यों जैसे दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश में किसान पराली जला देते हैं. इससे हवा बहुत खराब हो जाती है और लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है. इतना ही नहीं, पराली जलाने से जमीन की ताकत भी कम हो जाती है और मिट्टी के जरूरी पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं. इसलिए यह तरीका नुकसानदायक है.
अब सरकार और वैज्ञानिक इस कृषि कचरे को ऊर्जा में बदलने पर काम कर रहे हैं. पराली और अन्य कचरे से बायोगैस, बायोफ्यूल और बिजली बनाई जा सकती है. देश में GOBARdhan योजना और नेशनल बायोएनर्जी प्रोग्राम जैसे कई कदम उठाए गए हैं. जनवरी 2026 तक देश में करीब 979 बायोगैस प्लांट काम कर रहे हैं, जो इस कचरे से ऊर्जा बना रहे हैं.
जब इस कचरे से ऊर्जा बनाई जाती है, तो उससे जैविक खाद भी बनती है, जो खेतों के लिए बहुत अच्छी होती है. इससे किसानों को रासायनिक खाद कम इस्तेमाल करनी पड़ती है. साथ ही गांवों में रोजगार के नए मौके भी बनते हैं. इससे किसानों की आय बढ़ सकती है और देश को साफ ऊर्जा भी मिलती है.
हालांकि यह काम आसान नहीं है. सबसे बड़ी समस्या है इस कचरे को इकट्ठा करना और सही जगह तक पहुंचाना. खेत अलग-अलग जगहों पर होते हैं, इसलिए कचरा इकट्ठा करना मुश्किल होता है. इसके लिए अच्छे सिस्टम और नई तकनीक की जरूरत है, जिससे यह काम आसान हो सके.
सरकार इस दिशा में कई योजनाएं चला रही है और लोगों को इसके लिए प्रोत्साहित कर रही है. निजी कंपनियां भी अब इस क्षेत्र में आगे आ रही हैं, क्योंकि इससे पर्यावरण को फायदा होता है और बिजनेस के नए मौके भी मिलते हैं. यह मिलकर काम करने से इस समस्या का अच्छा समाधान निकल सकता है.
अब समय आ गया है कि हम कृषि कचरे को समस्या नहीं, बल्कि एक अवसर के रूप में देखें. पराली जलाने की जगह अगर इसका सही उपयोग किया जाए, तो यह देश के लिए ऊर्जा, रोजगार और पर्यावरण सुरक्षा का बड़ा साधन बन सकता है. इस तरह भारत धीरे-धीरे एक ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जहां कचरा भी काम की चीज बन जाता है और देश को आगे बढ़ाने में मदद करता है.
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