यूपी में गो-आधारित 'प्राकृतिक खेती' से 2.60 लाख किसानों की बढ़ी आय, बुंदेलखंड ने रचा इतिहास

यूपी में गो-आधारित 'प्राकृतिक खेती' से 2.60 लाख किसानों की बढ़ी आय, बुंदेलखंड ने रचा इतिहास

Natural Farming: गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि बुंदेलखंड में शुरू हुआ यह मॉडल अब पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बन रहा है. किसानों को कम खर्च में बेहतर उत्पादन मिल रहा है और बाजार में प्राकृतिक उत्पादों की मांग उन्हें अतिरिक्त लाभ दे रही है.

प्राकृतिक खेती से बदल रही यूपी के किसानों की तकदीरप्राकृतिक खेती से बदल रही यूपी के किसानों की तकदीर
क‍िसान तक
  • LUCKNOW,
  • Apr 30, 2026,
  • Updated Apr 30, 2026, 6:53 AM IST

उत्तर प्रदेश में ‘प्राकृतिक खेती मिशन’  (Natural Farming Mission) के जरिए खेती-किसानी की तस्वीर बदल रही है. रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों के जाल से निकलकर अब किसान देसी संसाधनों के सहारे खेती कर रहे हैं और यही बदलाव उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है. प्रदेश में इस समय 75 जिलों में 2356 क्लस्टर के जरिए 1.14 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र प्राकृतिक खेती के दायरे में आ चुका है. इसका सीधा फायदा 2.60 लाख किसानों को मिल रहा है. खास बात यह है कि यह खेती सिर्फ उत्पादन का तरीका नहीं बदल रही, बल्कि किसानों के खर्च को कम करके उनकी आमदनी बढ़ाने का रास्ता भी खोल रही है.

बुंदेलखंड बना अभियान का मजबूत चेहरा

इस अभियान का मजबूत चेहरा बुंदेलखंड बनकर उभरा है. झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट जैसे जिलों में ‘गो-आधारित प्राकृतिक खेती’ ने नई उम्मीद जगाई है. बुंदेलखंड क्षेत्र के करीब 23 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैली इस पहल ने पहले के समय सूखा और संसाधनों की कमी से जूझ रहे इलाके को एक नए मॉडल में बदल दिया है. इसका लाभ 22 हजार किसानों को मिला. गो आधारित जीवामृत और घनजीवामृत के इस्तेमाल से खेती की लागत तेजी से घटी है, वहीं फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई है.

किसानों को कम खर्च में मिल रहा बेहतर उत्पादन

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि बुंदेलखंड में शुरू हुआ यह मॉडल अब पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बन रहा है. किसानों को कम खर्च में बेहतर उत्पादन मिल रहा है और बाजार में प्राकृतिक उत्पादों की मांग उन्हें अतिरिक्त लाभ दे रही है. उन्होंने बताया कि किसानों की जेब पर बोझ घटाकर उनकी आमदनी बढ़ाना और लोगों को रसायनमुक्त भोजन उपलब्ध कराना योगी सरकार की प्राथमिकता है.

सुरक्षित और स्वास्थ्यकर खाद्यान्न

खेतों में केमिकल की जगह गो-आधारित फसलों से किसान आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं. गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि योगी सरकार का यह प्रयोग न सिर्फ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि प्रदेश को सुरक्षित और स्वास्थ्यकर खाद्यान्न की दिशा में भी आगे बढ़ा रहा है.

टॉक्सिन फ्री जैविक उपज की तेजी से बढ़ी मांग

श्याम बिहारी गुप्ता कहते हैं कि कोरोना महामारी के बाद स्वास्थ्य के प्रति बढ़ी वैश्विक जागरूकता के चलते बाजार में टॉक्सिन फ्री जैविक उपज की मांग तेजी से बढ़ी है. इससे जैविक खेती करने वाले किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल रहा है. उन्होंने बताया कि गो-आधारित खेती न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि मिट्टी की पोषकता और जन स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह बेहद महत्वपूर्ण है.

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