
राजस्थान में मॉनसून की देर से दस्तक और कम सक्रियता का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर साफ-साफ दिखाई दे रहा है. राज्य के कृषि विभाग के 9 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, यहां 165.39 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 92.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई पूरी हो सकी है. यानी कुल लक्ष्य का 56 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा हो पाया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 116.21 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी, जिससे इस बार कुल बुवाई अभी काफी पीछे चल रही है.
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस खरीफ सीजन के लिए अनाज फसलों की बुवाई का लक्ष्य 59.22 लाख हेक्टेयर रखा गया है, जिसमें अब तक 35.96 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है और 61 प्रतिशत लक्ष्य हासिल हुआ है. अब तक मक्का ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 9.70 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 6.70 लाख हेक्टेयर में बुवाई के साथ 69 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है.
बाजरा भी 40.50 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य में से 24.66 लाख हेक्टेयर तक पहुंचकर 61 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर चुका है. वहीं, ज्वार 55 प्रतिशत और धान केवल 44 प्रतिशत लक्ष्य तक ही पहुंच पाया है. वहीं, छोटे अनाज (स्मॉल मिलेट्स) की बुवाई अभी शुरुआती दौर में है और लक्ष्य का महज 3 प्रतिशत ही पूरा हुआ है.
दलहन फसलों की बात करें तो इस बार 41.72 लाख हेक्टेयर में इन फसलों की बुवाई का लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें अब तक 22.79 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है. यह लक्ष्य का 55 प्रतिशत है. क्षेत्रफल के लिहाज से मूंग सबसे बड़ी दलहन बनी हुई है और 15.90 लाख हेक्टेयर में इसकी बुवाई हो चुकी है.
हालांकि, उपलब्धि प्रतिशत के मामले में चवला सबसे आगे है, जहां 65 हजार हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 48 हजार हेक्टेयर में बुवाई के साथ 74 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो चुका है. मूंग और उड़द दोनों 60 प्रतिशत से नीचे हैं, जबकि अरहर और अन्य खरीफ दलहनों की बुवाई अभी काफी कम रही है और दोनों में केवल 13 प्रतिशत लक्ष्य ही पूरा हुआ है.
राज्य में तिलहन फसलों की बुवाई का लक्ष्य 27.50 लाख हेक्टेयर है, जिसमें 16.44 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है. यानी 60 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो गया है. इनमें मूंगफली सबसे आगे निकलकर 11.50 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य में से 9.20 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है और 80 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है. वहीं, सोयाबीन की बुवाई 6.75 लाख हेक्टेयर तक पहुंची है, जो लक्ष्य का 61 प्रतिशत है. इसके उलट तिल में केवल 19 प्रतिशत और अरंडी में महज 1 प्रतिशत लक्ष्य ही पूरा हो सका है, जिससे इन फसलों की बुवाई मॉनसूनी बारिश पर अधिक निर्भर दिखाई दे रही है.
इधर, अन्य खरीफ फसलों में कपास का प्रदर्शन मजबूत दिखाई दे रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 7.20 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 5.15 लाख हेक्टेयर में बुवाई पूरी हो चुकी है और यह 72 प्रतिशत उपलब्धि के साथ प्रमुख फसलों में सबसे आगे है. हालांकि, पिछले साल इसी अवधि तक कपास का रकबा 6.08 लाख हेक्टेयर था, इसलिए इस बार क्षेत्रफल अभी भी कम है.
इसके अलावा, ग्वार की बुवाई 25.50 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 9.82 लाख हेक्टेयर तक पहुंची है, जो केवल 39 प्रतिशत है. दूसरी ओर गन्ने में 89 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो चुका है, जबकि अन्य फसलों में 58 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है.
पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना करें तो अधिकांश प्रमुख फसलों का रकबा इस बार कम है. बाजरा, धान, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ, उड़द, सोयाबीन, कपास और ग्वार सभी का क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले घटा है. इसके उलट मूंगफली का रकबा बढ़ा है और यह पिछले साल के 7.83 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 9.20 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है.
राज्य में अभी कुल लक्ष्य का 44 प्रतिशत क्षेत्र बुवाई के लिए शेष है. ऐसे में जुलाई के दूसरे पखवाड़े में होने वाली बारिश खरीफ सीजन की रफ्तार तय करेगी. अगर मॉनसून सामान्य बना रहता है तो धान, ज्वार, ग्वार, तिल, अरंडी और अन्य पिछड़ी फसलों की बुवाई में तेजी आने की संभावना है, जबकि कपास, मूंगफली और मक्का जैसी फसलें अपने लक्ष्य के और करीब पहुंच सकती हैं.