
आंध्र प्रदेश सरकार के नागरिक आपूर्ति मंत्री नदेंडला मनोहर ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में धान खरीद व्यवस्था में किए गए सुधारों का बड़ा असर देखने को मिला है. उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार के दूसरे वर्ष में 74 लाख टन धान की खरीद की गई, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा खरीद अभियान है. उन्होंने कहा कि इससे किसानों को तेज भुगतान और पूरी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है.
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल में 42 लाख टन धान की खरीद हुई थी, जबकि मौजूदा सरकार ने इसे बढ़ाकर 74 लाख टन तक पहुंचा दिया है. उन्होंने कहा कि इस दौरान करीब 31,000 करोड़ रुपये मूल्य का धान खरीदा गया और 11 लाख से अधिक किसानों में से 95 फीसदी को भुगतान 24 घंटे के भीतर सीधे बैंक खातों में भेज दिया गया.
राज्य सरकार ने धान खरीद प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ते हुए कई नई व्यवस्थाएं लागू की हैं. अब प्रत्येक धान की बोरी पर क्यूआर कोड लगाया जा रहा है और ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम के जरिए किसान से लेकर उचित मूल्य की दुकान तक पूरे सफर की निगरानी की जा सकेगी.
किसानों को वॉट्सऐप के माध्यम से भी धान बेचने की सुविधा दी गई है. इसके साथ ही गोदाम, जूट बैग, परिवहन और नमी जांच जैसी प्रक्रियाओं में भी पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है.
मंत्री ने कहा कि पिछले सीजन में जूट बैग और गोदामों की कमी चुनौती बनी थी. इसे देखते हुए आगामी खरीफ सीजन से रायतू सेवा केंद्रों पर जूट बैग उपलब्ध कराए जाएंगे. परिवहन में देरी रोकने के लिए किसानों के बैंक खातों में 48 घंटे के भीतर परिवहन शुल्क भेजा जाएगा. वहीं, धान ले जाने वाले ट्रकों की निगरानी के लिए आरएफआईडी आधारित प्रणाली लागू की जाएगी.
राज्य सरकार पूरे प्रदेश में एक ही मॉडल के मॉइश्चर मीटर लगाने का काम कर रही है, ताकि नमी जांच की प्रक्रिया एक समान हो सके. मंत्री ने बताया कि करीब 90 फीसदी उपकरण लगाए जा चुके हैं और बाकी काम खरीफ सीजन शुरू होने से पहले पूरा कर लिया जाएगा.
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी स्कूलों के मध्याह्न भोजन और कल्याणकारी छात्रावासों में बेहतर गुणवत्ता वाला बीपीटी चावल उपलब्ध कराया जा रहा है. साथ ही राज्य की 10 फीसदी टूटे चावल वाली नीति को केंद्र सरकार ने स्वीकार करते हुए देशभर में लागू करने का निर्णय लिया है.
मंत्री ने कहा कि शुरुआती आकलन के अनुसार, इस सीजन में अल नीनो के असर से धान उत्पादन में लगभग 15 फीसदी तक गिरावट आ सकती है. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को पहले से जागरूक करेगी और उत्पादन पर संभावित असर कम करने के लिए आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन और मदद उपलब्ध कराएगी. (पीटीआई)