
पंजाब के फाजिल्का की अनाज मंडी में बारिश के बाद जलभराव से धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है. सोमवार रात हुई बारिश के चलते पूरी मंडी में करीब तीन फीट तक पानी भर गया. खुले आसमान के नीचे रखी धान की फसल पानी में डूब गई और धान के दाने पानी पर तैरते नजर आए. अपनी मेहनत से तैयार फसल को बर्बाद होता देख किसान परेशान नजर आए.
जलभराव से गुस्साए किसानों ने विरोध जताने के लिए नाव का सहारा लिया. किसान यूनियन के सदस्य नाव के जरिए मंडी में घूमकर पानी में डूबी धान की फसल का निरीक्षण करते नजर आए. किसानों का कहना है कि उन्होंने बड़ी मेहनत से फसल तैयार की थी और अब मंडी में पहुंचने के बाद उनकी उपज बर्बाद हो रही है. ऐसे में किसानों ने सवाल उठाया कि उनकी फसल के नुकसान की भरपाई कैसे होगी.
किसानों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि डिप्टी कमिश्नर का कार्यालय मंडी से कुछ ही दूरी पर स्थित है, लेकिन इसके बावजूद अधिकारी मौके पर हालात का जायजा लेने नहीं पहुंचे. किसानों ने नाराजगी जताई कि इतनी बड़ी समस्या के बावजूद उन्हें न तो प्रशासन की ओर से कोई आश्वासन मिला और न ही नुकसान की भरपाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई.
आढ़ती यूनियन के अध्यक्ष गोल्डी सचदेवा ने कहा कि मंडी में पानी की निकासी की समस्या को लेकर प्रशासन को आठ से दस बार बताया जा चुका था. इसके बावजूद पानी की निकासी का उचित इंतजाम नहीं किया गया, जिसके कारण बारिश के बाद मंडी में जलभराव की स्थिति पैदा हुई. उन्होंने कहा कि किसानों की फसल बर्बाद होने के साथ-साथ आढ़तियों पर भी करोड़ों रुपये के नुकसान का बोझ पड़ने की आशंका है. उनका कहना है कि पानी की निकासी की व्यवस्था समय रहते की जाती तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था.
मंडी में जलभराव और उपज के नुकसान से नाराज किसान और आढ़तियों नेशनल हाईवे पर धरना दिया. किसानों और आढ़तियों का कहना है कि पानी की निकासी नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है. वहीं, आढ़तियों ने सवाल उठाया कि प्रशासन की ओर से समय पर व्यवस्था नहीं किए जाने के बावजूद नुकसान का बोझ उन पर क्यों डाला जाता है.
वहीं, मामले को लेकर फाजिल्का के एसडीएम जुगराज सिंह ने कहा कि बारिश के कारण फसलों को नुकसान हुआ है. उन्होंने बताया कि मंडी में पानी की निकासी की व्यवस्था के लिए बात चल रही है. मंजूरी मिलते ही पानी की निकासी का काम शुरू कर दिया जाएगा.