
कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार ने बातचीत शुरू कर दी है. कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की. इस दौरान गन्ना किसानों की मांगों, चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत (MSP) तय करने और किसानों को हो रही परेशानियों पर चर्चा हुई. इससे पहले केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दोनों राज्यों के किसान नेताओं के साथ करीब तीन घंटे तक बैठक की थी. बैठक के बाद किसानों की समस्याओं का समाधान निकालने के लिए एक सप्ताह के भीतर उच्च स्तरीय समिति बनाने का फैसला लिया गया.
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सोमवार देर रात केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी से मिलने पहुंचे. वह दिन में हुई बैठक में शामिल नहीं हो पाए थे. इसके बाद उन्होंने अलग से मुलाकात कर राज्य के गन्ना किसानों से जुड़े मुद्दे उठाए. मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, बैठक में गन्ना किसानों की समस्याओं, चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत तय करने और दूसरे जरूरी मुद्दों पर चर्चा हुई. इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य किसानों की मांगों को केंद्र सरकार के सामने रखना और उनके समाधान का रास्ता निकालना था.
गन्ना किसानों की मांगों पर चर्चा के लिए केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्नाटक और महाराष्ट्र के किसान नेताओं के साथ करीब तीन घंटे तक बैठक की. बैठक में दोनों राज्यों के गन्ना किसानों की समस्याओं और उनके विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई. बैठक के बाद किसानों की शिकायतों का समाधान निकालने के लिए एक सप्ताह के भीतर उच्च स्तरीय समिति बनाने का फैसला किया गया. इस समिति का उद्देश्य किसानों की मांगों पर विचार करना और उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए जरूरी कदम सुझाना होगा.
गन्ने की खेती करने वाले किसानों की कमाई का सीधा संबंध चीनी उद्योग से है. किसान गन्ना मिलों को बेचते हैं और मिलें इससे चीनी बनाती हैं. चीनी की कीमतों में बदलाव का असर मिलों की कमाई और किसानों को भुगतान करने की उनकी क्षमता पर भी पड़ सकता है. चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत वह सबसे कम कीमत है, जिस पर चीनी मिलें चीनी बेच सकती हैं. किसान संगठनों और चीनी उद्योग से जुड़े लोगों के लिए यह कीमत एक अहम मुद्दा है. अगर चीनी की बिक्री से मिलों को पर्याप्त कमाई नहीं होती, तो गन्ना किसानों को समय पर भुगतान करने में भी परेशानी हो सकती है.
हालांकि, न्यूनतम बिक्री कीमत में बदलाव से किसानों को कितना फायदा होगा, यह चीनी की बाजार कीमत, मिलों की आर्थिक स्थिति और गन्ने के भुगतान जैसे दूसरे पहलुओं पर भी निर्भर करता है.
कर्नाटक और महाराष्ट्र में गन्ना किसानों की मांगों और विरोध के बीच केंद्र सरकार की बैठक को आगे की बातचीत के रूप में देखा जा रहा है. अब उच्च स्तरीय समिति के गठन और उसकी ओर से सुझाए जाने वाले उपायों पर नजर रहेगी. किसानों को उम्मीद है कि उनकी समस्याओं पर ठोस फैसला लिया जाएगा. खास तौर पर चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत और गन्ना किसानों से जुड़े दूसरे मुद्दों पर समाधान निकलने से उन्हें राहत मिल सकती है. हालांकि, समिति के गठन और आगे के फैसलों के बाद ही साफ होगा कि किसानों की मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं. (PTI)
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