
रबी सीजन में गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए Pusa Wheat 3471 (HD 3471) एक नई उन्नत किस्म के रूप में सामने आई है. इसे ICAR-Indian Agricultural Research Institute (IARI) ने विकसित किया है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक HD 3471 को Molecular Marker-Assisted Backcross Breeding (MABB) तकनीक के जरिए विकसित किया गया है और यह लोकप्रिय गेहूं किस्म HD 3086 का उन्नत रूप है.
HD 3471 को विशेष रूप से उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्र यानी North Western Plains Zone (NWPZ) में समय पर बुवाई और सिंचित परिस्थितियों के लिए प्रस्तावित किया गया है. AICRP के रिकॉर्ड में भी NWPZ के लिए समय पर बुवाई वाली परिस्थितियों में MABB आधारित गेहूं परीक्षणों की जानकारी मिलती है.
Pusa Wheat 3471 की खास बात यह है कि इसे पहले से प्रचलित HD 3086 (Pusa Gautami) में सुधार करके तैयार किया गया है. HD 3086 स्वयं NWPZ के समय पर बोए जाने वाले सिंचित क्षेत्रों के लिए विकसित किस्म है. ICAR के शोध प्रकाशन के अनुसार HD 3086 की औसत उपज 5.46 टन प्रति हेक्टेयर यानी करीब 54.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और आनुवंशिक उपज क्षमता 7.1 टन प्रति हेक्टेयर यानी करीब 71 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है.
HD 3086 में पीला रतुआ और भूरा रतुआ के प्रति प्रतिरोध के साथ अच्छी क्वालिटी संबंधी विशेषताएं भी दर्ज की गई थीं. अब HD 3471 को इसी किस्म के उन्नत रूप के तौर पर विकसित किए जाने से किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के लिए यह महत्वपूर्ण किस्म बनती है.
इस किस्म को विकसित करने में MABB यानी Marker-Assisted Backcross Breeding का इस्तेमाल किया गया है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक HD 3471 में सूखा सहनशीलता से संबंधित QTL को शामिल करने का प्रयास किया गया. परीक्षण से जुड़े एक उपलब्ध विवरण में इसे NWPZ की सिंचित और समय पर बुवाई वाली परिस्थितियों के लिए MABB गेहूं जीनोटाइप बताया गया है.
हालांकि यहां किसानों के लिए एक अहम बात समझना जरूरी है. उपलब्ध परीक्षण विवरण में सूखा सहनशीलता से जुड़े गुणों को खेत की परिस्थितियों में और वेरिफाई करने की सिफारिश का भी उल्लेख है. इसलिए केवल इस आधार पर HD 3471 को हर परिस्थिति में सूखा सहन करने वाली किस्म मान लेना सही नहीं होगा.
Pusa Wheat 3471 मुख्य रूप से North Western Plains Zone में timely-sown irrigated conditions, यानी समय से बोई जाने वाली सिंचित गेहूं की फसल को ध्यान में रखकर विकसित की गई है. इसकी मूल किस्म HD 3086 भी इसी कृषि-पारिस्थितिकी क्षेत्र के लिए अधिसूचित की गई थी.
HD 3471 की चर्चा 2026 के रबी सीजन से पहले भी सामने आई है. अक्टूबर 2026 की एक कृषि समाचार रिपोर्ट में इसे बदलती जलवायु परिस्थितियों के संदर्भ में गेहूं की नई किस्म के रूप में बताया गया है.
किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि किसी नई किस्म का बीज खरीदने से पहले उस किस्म की संबंधित राज्य के लिए आधिकारिक अनुशंसा, बीज की प्रमाणिकता और स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह जरूर जांच लें.