ग्रीष्मकालीन मूंग बनेगी कमाई का नया जरिया, उन्नत किस्में और सही प्रबंधन से होगा बंपर उत्पादन

ग्रीष्मकालीन मूंग बनेगी कमाई का नया जरिया, उन्नत किस्में और सही प्रबंधन से होगा बंपर उत्पादन

ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर होती है. दो महीने की अवधि वाली मूंग की खेती से किसानों की अच्छी आमदनी भी बढ़ी है.

मूंग की खेतीमूंग की खेती
धर्मेंद्र सिंह
  • Bhopal ,
  • Apr 19, 2026,
  • Updated Apr 19, 2026, 12:27 PM IST

मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से में ग्रीष्म ऋतु के दौरान दलहनी फसलों में मूंग की खेती प्रमुख रूप से की जाती है. मूंग न केवल प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, बल्कि इसका भूसा पशुओं के लिए भी अत्यंत पौष्टिक माना जाता है. इसके अलावा मूंग की फसल अपनी जड़ों के माध्यम से वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करती है, जिससे मृदा की उर्वरता और स्वास्थ्य बेहतर होता है.

प्रदेश के किसान कम अवधि में तैयार होने वाली उन्नत किस्मों जैसे आईपीएम 410-3 (शिखा) और आईपीएम 205-7 (विराट) का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहे हैं, जिससे उन्हें कम समय में बेहतर उत्पादन मिल रहा है.

उपयुक्त भूमि और मिट्टी

मूंग की फसल लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में उगाई जा सकती है, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट से दोमट मिट्टी, जिसका पीएच मान 7 से 8 के बीच हो, सबसे उपयुक्त मानी जाती है.

बुवाई का सही समय

ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई अप्रैल के पहले से दूसरे सप्ताह के बीच कर देनी चाहिए. बुवाई में देरी होने पर फूल आने के समय अधिक तापमान का असर पड़ता है, जिससे फलियों की संख्या कम हो जाती है और उत्पादन प्रभावित होता है.

बीज दर और बुवाई विधि

छोटे और मध्यम दाने वाली किस्मों के लिए 20 से 25 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है, जबकि बड़े दाने वाली किस्मों के लिए 25 से 30 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है.

पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 8 से 10 सेंटीमीटर रखना उपयुक्त रहता है.

बीज उपचार जरूरी

बुवाई से पहले बीज को फफूंदनाशक दवा थायरम (2 ग्राम) और कार्बेंडाजिम (1 ग्राम) प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना चाहिए. इससे रोगों और कीटों का प्रकोप कम होता है.

इसके बाद रायजोबियम और पीएसबी कल्चर 10-10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचार करना लाभकारी रहता है.

खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

अच्छी पैदावार के लिए 20 किलोग्राम यूरिया, 50 किलोग्राम फास्फोरस और 20 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से देना चाहिए. जिन क्षेत्रों में गंधक की कमी हो, वहां 20 किलोग्राम गंधक प्रति हेक्टेयर का उपयोग करना चाहिए.

सिंचाई प्रबंधन

ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल के लिए 3 से 4 सिंचाई पर्याप्त होती है. अधिक तापमान के कारण समय-समय पर सिंचाई करना जरूरी होता है, जिससे पौधों का विकास बेहतर हो सके.

खरपतवार नियंत्रण

खरपतवार नियंत्रण के लिए पिंडीमैथिलीन 30 ईसी दवा 0.750 से 1 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के बाद और अंकुरण से पहले नमी युक्त खेत में छिड़काव करना चाहिए. इस तरह वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती से कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें: 

जीएमओ विवाद के बीच चीन का एक्शन मोड ऑन, तीन भारतीय चावल कंपनियों के लाइसेंस रद्द
गन्ना पेराई सत्र 2026-27 के लिए नई नीति लागू, किसानों को बड़ा फायदा

MORE NEWS

Read more!