
मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन अब तेज होने जा रहा है.संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े 15 किसान संगठनों ने किसानों की लंबित समस्याओं और अधिकारों को लेकर 27 जुलाई 2026 को नर्मदापुरम से भोपाल तक विशाल किसान पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है. यह पदयात्रा सुबह 9 बजे सेठानी घाट, नर्मदापुरम से शुरू होकर मुख्यमंत्री निवास, भोपाल की ओर रवाना होगी.
किसान संगठनों का कहना है कि वर्तमान में सरकार किसानों की मूंग उपज का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद रही है. इससे अधिकांश किसानों को अपनी बची हुई उपज खुले बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है और उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है.
संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि प्रदेश के हर किसान की पूरी मूंग उपज (100 प्रतिशत) न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जानी चाहिए.किसान संगठनों ने मांग की है कि खरीदी की मात्रा पर लगी सीमा तत्काल समाप्त की जाए और सभी पात्र किसानों को बिना किसी भेदभाव के MSP का लाभ मिले.
किसानों का कहना है कि यदि सरकार पूरी उपज की खरीद सुनिश्चित नहीं करती है तो किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी. उनका दावा है कि समर्थन मूल्य की व्यवस्था तभी प्रभावी होगी, जब किसानों की पूरी उपज MSP पर खरीदी जाएगी.
मूंग खरीदी के अलावा किसान संगठनों ने कई अन्य मांगों को भी आंदोलन का हिस्सा बनाया है. उनका कहना है कि ई-टोकन व्यवस्था में सुधार कर किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराई जाए.प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि किसानों को समय पर बीमा राशि मिल सके.
संगठनों ने कृषि कार्य के लिए प्रतिदिन 10 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग करते हुए लोड सेटिंग और मेंटेनेंस के नाम पर होने वाली अघोषित बिजली कटौती पर रोक लगाने की भी मांग की है.
किसान संगठनों ने सभी फसलों की खरीद MSP पर सुनिश्चित करने के लिए MSP गारंटी कानून बनाने की मांग दोहराई है. साथ ही डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन आयोग की अनुशंसा के अनुसार C₂ + 50% के फार्मूले को तत्काल लागू करने की मांग भी उठाई है.
इसके अलावा खेत सड़क योजना लागू करने, किसानों को आवश्यकता के अनुसार विद्युत ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने तथा किसान विरोधी बताए जा रहे भारत–अमेरिका ट्रेड डील को समाप्त करने की मांग भी प्रमुख रूप से शामिल है.
संयुक्त किसान मोर्चा एवं उससे जुड़े 15 किसान संगठनों ने प्रदेश के किसानों, खेत मजदूरों और किसान हितैषी नागरिकों से 27 जुलाई की इस शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक पदयात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है. किसान संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन किसानों के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई है तथा सरकार तक उनकी समस्याओं को मजबूती से पहुंचाने का प्रयास है.