
मध्यप्रदेश सरकार की गेहूं उपार्जन व्यवस्था के तहत आज 7 अप्रैल से ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकृत किसानों के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग की सुविधा शुरू हो गई है. इसके जरिए किसान अब सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए पहले से अपना समय निर्धारित कर सकेंगे, जिससे खरीद प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और आसान होगी. मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभागों में 10 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद शुरू होगी.
वहीं, प्रदेश के बाकी संभागों (डिविजन) में 15 अप्रैल से खरीद प्रक्रिया शुरू होगी. इस व्यवस्था के तहत किसानों को भीड़ से बचाने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्लॉट सिस्टम लागू किया गया है. ई-उपार्जन पोर्टल पर पहले से पंजीकृत किसान ही इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे. स्लॉट बुकिंग के बाद किसान निर्धारित तारीख और समय पर ही खरीद केंद्र पर अपनी उपज लेकर पहुंचेंगे, जिससे इंतजार और अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनेगी. यह कदम खरीद प्रक्रिया को डिजिटल और आसान बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
बयान के मुताबिक, इस साल प्रदेश में 3627 उपार्जन केंद्र (खरीद केंद्र) बनाए गए हैं और 19 लाख 4 हजार से ज्यादा किसानों ने पंजीकरण कराया है. इसके अलावा गेहूं की खरीद 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का निर्धारित समर्थन मूल्य मिल सकेगा. इसमें 2585 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य और राज्य सरकार की ओर से 40 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस शामिल है.
इधर, इससे पहले सोमवार को भोपाल जिले में गेहूं उपार्जन की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक हुई. इस दौरान एडीएम सुमित पांडे ने अधिकारियों को खरीद व्यवस्था को किसानों के लिए पूरी तरह सरल और सुविधाजनक बनाने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें उपार्जन केंद्र तक पहुंचने और गेहूं बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो. उन्होंने विशेष रूप से व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने और अनावश्यक भीड़ से बचाव पर ध्यान देने को कहा.
उन्होंने बताया कि उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन करा चुके किसानों के लिए 7 अप्रैल से स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिससे किसान तय समय पर केंद्रों पर पहुंच सकेंगे. वहीं, पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जिले में 10 अप्रैल से गेहूं की खरीदी शुरू होगी. प्रशासन का लक्ष्य है कि पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से संचालित हो और किसानों को बिना किसी बाधा के अपनी उपज बेचने का अवसर मिले.