
असम, जो देश का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है, वहां के चाय बागानों में इस साल मौसम अनुकूल रहने की वजह से बेहतर क्वालिटी वाली 'सेकंड फ्लश' चाय का उत्पादन होने की उम्मीद है. उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान और बारिश की संतुलित स्थिति ने चाय की पत्तियों की क्वालिटी को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आमतौर पर असम में हर साल करीब 100 मिलियन किलोग्राम 'सेकंड फ्लश' चाय का उत्पादन होता है. वहीं, राज्य के कुल वार्षिक चाय उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत रहती है. बेहतर स्वाद, गहरे रंग और विशिष्ट सुगंध के कारण 'सेकंड फ्लश' चाय की देश और विदेश दोनों बाजारों में काफी मांग रहती है.
'बिजनेस लाइन' के मुताबिक, नॉर्थ ईस्टर्न टी एसोसिएशन (NETA) के सलाहकार विद्यानंद बोरकाकोटी ने बताया कि चाय उद्योग काफी हद तक मौसम की स्थितियों पर निर्भर करता है. हाल के वर्षों में मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण 'प्योर सेकंड फ्लश' सीजन की अवधि कम हो गई है. हालांकि, इस साल अच्छे मौसम की वजह से असम में 'प्योर सेकंड फ्लश' की फसल बहुत अच्छी हुई है. साथ ही उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई भी चाय 'प्योर सेकंड फ्लश' असम चाय के खास स्वाद और खासियत का मुकाबला नहीं कर सकती.
असम की 'सेकंड फ्लश' चाय अपने कड़क स्वाद, ताजगी और भरपूर माल्टी मिठास के लिए दुनिया भर में मशहूर है. 'सेकंड फ्लश' चाय की फसल आमतौर पर मई के आखिर और जून के बीच तोड़ी जाती है. हालांकि, वर्ष 2026 की शुरुआत असम के चाय उद्योग के लिए अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही. जनवरी से मार्च के दौरान राज्य में चाय उत्पादन पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 38 प्रतिशत कम दर्ज किया गया. हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट को व्यापक संदर्भ में देखने की जरूरत है, क्योंकि 2025 की पहली तिमाही में चाय उत्पादन असाधारण रूप से अधिक रहा था.
विद्यानंद बोरकाकोटी के अनुसार, पिछले साल की पहली तिमाही में रिकॉर्ड स्तर का उत्पादन हुआ था, इसलिए उद्योग को इस वर्ष भी उसी स्तर के उत्पादन की उम्मीद नहीं थी. उन्होंने बताया कि अप्रैल और मई 2025 के दौरान असम में 106.54 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ था. ऐसे में इस वर्ष इसी अवधि में उस स्तर तक पहुंच पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है. बोरकाकोटी ने कहा कि इसके चलते जनवरी से मई 2026 के दौरान राज्य का कुल चाय उत्पादन पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम रहने की संभावना है. इसके बावजूद, उद्योग को उम्मीद है कि अनुकूल मौसम और बेहतर क्वालिटी वाली 'सेकंड फ्लश' चाय का उत्पादन बाजार में बेहतर कीमत दिलाने में मदद करेगा, जिससे उत्पादन में कमी के असर को कुछ हद तक संतुलित किया जा सकेगा.
2025 में असम ने 699 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन किया, जो भारत के कुल चाय उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत था. अच्छी क्वालिटी वाली असम चाय की भारी मांग को देखते हुए, गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र में 1 अप्रैल से 31 मई 2026 की अवधि के दौरान CTC चाय की औसत कीमत पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 33.86 रुपये प्रति किलोग्राम अधिक थी. खेती के स्तर पर चाय की कीमतें कई वजहों से ऊपर-नीचे होती रहती हैं, जैसा कि खेती से जुड़ी दूसरी चीज़ों के मामले में भी होता है. हरी पत्तियों की कीमतें भी उसी हिसाब से बदलती रहती हैं.
बोरकाकोटी ने कहा कि हरी पत्तियों की कीमतें मुख्य रूप से उनकी क्वालिटी पर निर्भर करती हैं. अभी 45 प्रतिशत 'फाइन लीफ काउंट' (जिसे बैरोमेट्रिक काउंट से मापा जाता है) वाली हरी पत्तियों का दाम लगभग 45 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि 50 प्रतिशत से ज़्यादा 'फाइन लीफ़ काउंट' वाली हरी पत्तियों का दाम 45 रुपये प्रति किलोग्राम से ज़्यादा है.