
तमिलनाडु में कुरुवई धान सीजन शुरू होने से पहले डेल्टा क्षेत्र के किसानों के सामने सिंचाई को लेकर चुनौती खड़ी होती दिख रही है. पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने राज्य सरकार से मांग की है कि अगर मेट्टूर बांध से तय समय पर पानी नहीं छोड़ा जा सके तो किसानों को भूजल आधारित खेती के लिए विशेष सहायता पैकेज दिया जाए. उन्होंने कहा कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो खेती और ग्रामीण रोजगार दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
तमिलनाडु में परंपरा के अनुसार, हर साल 12 जून को मेट्टूर बांध से सिंचाई के लिए कावेरी का पानी छोड़ा जाता है, जिससे तंजावुर, तिरुवरूर, नागपट्टिनम और मयिलादुथुरई समेत 10 से अधिक जिलों में कुरुवई धान की खेती शुरू होती है. लेकिन इस बार मेट्टूर बांध में केवल 41.60 टीएमसी यानी 41.60 हजार मिलियन घन फीट पानी मौजूद है, जबकि इसकी कुल क्षमता 93.47 हजार मिलियन घन फीट है. ऐसे में तय समय पर पानी छोड़े जाने की संभावना कमजोर बताई जा रही है.
अंबुमणि रामदास ने कहा कि कर्नाटक के कावेरी बेसिन से जुड़े प्रमुख जलाशयों की स्थिति भी राहत देने वाली नहीं है. कृष्णराज सागर में 11.49 हजार मिलियन घन फीट, कबिनी में 4.47 हजार मिलियन घन फीट, हरंगी में 2.97 हजार मिलियन घन फीट और हेमावती में 11.41 हजार मिलियन घन फीट पानी उपलब्ध है. चारों जलाशयों में कुल जल भंडारण 33.45 हजार मिलियन घन फीट है, जो उनकी संयुक्त क्षमता 114.57 हजार मिलियन घन फीट का केवल 29.08 प्रतिशत है. ऐसे में तमिलनाडु के लिए अतिरिक्त पानी मिलने की संभावना सीमित बताई जा रही है.
रामदास ने कहा कि मेट्टूर से नियमित सिंचाई शुरू करने के लिए जलस्तर को मौजूदा 79 फीट से बढ़कर कम से कम 90 फीट तक पहुंचना होगा. इसके लिए औसतन 1.5 हजार मिलियन घन फीट प्रतिदिन जल प्रवाह की जरूरत होगी. उन्होंने कहा कि अभी करीब 12 हजार मिलियन घन फीट अतिरिक्त पानी की आवश्यकता है और इसके लिए मेट्टूर में लगातार 18,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह जरूरी होगा.
पीएमके नेता ने दावा किया कि पिछले साल लगभग 6.13 लाख एकड़ क्षेत्र में कुरुवई खेती हुई थी, लेकिन अगर समय पर पानी नहीं मिला तो यह रकबा घटकर 3 लाख एकड़ से नीचे जा सकता है. इसे देखते हुए उन्होंने सरकार से सब्सिडी पर बीज, उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्व उपलब्ध कराने, 24 घंटे थ्री-फेज बिजली देने और किसानों को प्रति एकड़ 5,000 रुपये डीजल सहायता देने की मांग की. (पीटीआई)