कम बारिश की आशंका के बीच तेलंगाना सरकार अलर्ट, फसल चयन के लिए किसानों को जागरूक करेंगे अध‍िकारी

कम बारिश की आशंका के बीच तेलंगाना सरकार अलर्ट, फसल चयन के लिए किसानों को जागरूक करेंगे अध‍िकारी

कम बारिश की आशंका के बीच तेलंगाना सरकार ने किसानों के लिए नई रणनीति तैयार की है. ग्राम सभाओं के जरिए कम पानी वाली फसलों, सूखा सहन करने वाली किस्मों और वैकल्पिक खेती के तरीकों की जानकारी दी जाएगी. फसल अवशेष जलाने पर भी सख्ती के संकेत दिए गए हैं.

Kharif crop selection telanganaKharif crop selection telangana
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 05, 2026,
  • Updated Jun 05, 2026, 12:23 PM IST

तेलंगाना में इस साल सामान्य से कम बारिश की संभावना को देखते हुए राज्य सरकार ने खेती की तैयारी को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है. कृषि मंत्री तुम्‍मला नागेश्‍वर राव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों के बीच गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए और उन्हें ऐसी फसलों की ओर प्रेरित किया जाए, जिनमें पानी की जरूरत कम हो. सरकार का मानना है कि समय रहते खेती के तरीके और फसल चयन में बदलाव किसानों को संभावित जोखिम से बचाने में मदद कर सकता है.

ग्राम सभाओं के जरिए किसानों तक पहुंचेगा संदेश

कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि कम वर्षा के अनुमान को ध्यान में रखते हुए गांवों में 6, 8 और 10 जून को ग्राम सभाएं आयोजित की जाएं. इन बैठकों के जरिए किसानों को मौसम के अनुसार फसल योजना, जल प्रबंधन और वैकल्पिक खेती के विकल्पों की जानकारी दी जाएगी. यह अभियान राज्य सरकार के निर्देशों के अनुरूप चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसानों तक संदेश पहुंच सके.

जिला स्तर पर तैयार हुई फसल योजना

राज्य सरकार ने संभावित कम बारिश की स्थिति को देखते हुए पहले से जिला-वार फसल योजना तैयार की है. अधिकारियों को कहा गया है कि वे किसानों को सूखा सहन करने वाली किस्मों और ऐसी कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी दें, जो कम पानी में बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हों. इसका उद्देश्य मौसम की अनिश्चितता के बीच खेती की लागत और जोखिम दोनों को कम करना है.

कम अवधि वाली धान और बारिश आधारित फसलों पर जोर

मंत्री ने विशेष रूप से उन किसानों पर ध्यान देने को कहा, जो बोरवेल और लिफ्ट सिंचाई पर निर्भर हैं. ऐसे किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों और बारिश आधारित फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही गई. 

पराली जलाने पर सख्ती, वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा

बैठक में फसल अवशेष जलाने के मुद्दे पर भी सख्त रुख दिखाया गया. मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे किसानों को जागरूक करें कि फसल अवशेष (पराली) जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है और पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है. सरकार ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. साथ ही किसानों को अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन के तरीकों की जानकारी देने पर जोर दिया गया.

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