
झारखंड में किसानों को समय-समय पर कृषि सलाह दी जाती है. ताकि किसान मौसम के हिसाब से खेती कर सकें और अच्छी कमाई कर सके. इस वक्त राज्य में मिचौंग के प्रभाव से हुई बारिश बाद ठंड का प्रकोप बढ़ गया है ऐसे मे यह जानना जरूरी है कि किसान अपनी फसल से लेकर मवेशियों तक का ख्याल कैसे रखें. इसे देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों की तरफ से सलाह जारी किया गया है. इन सलाहों का पालन करके किसान फसलों और मवेशियों में होने वाले रोग बीमारियों से बच सकते हैं साथ ही इससे होने वाले नुकसान से बचने के साथ साथ अच्छी उपज भी हासिल कर सकते हैं.
किसानों के लिए सामान्य सलाह जारी करते हुए कहा गया है कि किसान जल्द से जल्द शीतकालीन फसलों की बुवाई या रोपाई खत्म करें. जिन किसानों ने नंबवर महीने में गेहूं की खेती की है वह गेंहू अभी कल्ले फूटने की अवस्था में है, इसलिए खरपतवार नियंत्रण करने की आवश्यकता है. खरपतवार नियंत्रण करने के लिए ओइसोप्रोटूरान 75 फीसदी 500 ग्राम प्रति एकड़ में 300-400 लीटर पानी मिलाकर छिड़काव करें. इसके अलावा मकई की खेती करने वाले किसान खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ 50 किलोग्राम यूरिया, 100 किलोग्राम एसएसपी और 25 किलोग्राम एमओपी का प्रयोग करें.
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अरहर को लेकर सलाह जारी करते हुए वैज्ञानिकों ने बताया कि अरहर के पौधे में अभी फूल लगने की अवस्था में है. ऐसे समय में तापमान में गिरावट आने पर कीट के प्रकोप की संभावना हो जाती है. अगर अरहरे के पौधो मुड़े हुए दिखाई दे तो प्रति एकड़ की दर से इन्डोस्कार्ब 120 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें. इसके अलावा स्पीनोसेड 20 ग्राम प्रति एकड़ या नीम 1500 पीपीएम 800 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें. इससे कीट का लारवा मर जाता है. पर पत्तो में जालीनुमा आकार के अंदर रहने से कीटनाशक के संपर्क में कीड़ा नहीं आ पाता है. इसके लिए गैस बनने वाली दवा का छिड़काव करें.
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जिन किसानों के खेतों में टमाटर के पौधे मुरझाकर सूख रहे हैं वो फंगीसाइड स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 0.3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें. इसके अलावा प्रभावित पौधों को खेत से उखाड़ कर निकाल दें. इसके अलावा फूलगोभी और पत्तागोभी में सड़न को नियंत्रित करने के लिए प्रति ग्राम पानी में दो ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के साथ दो ग्राम मेटलैक्सिल और मैंकोजेब का छिड़काव करें. वहीं वातावरण के तापमान में कमी साथ-साथ तालाब के पानी के तापमान में कमी आने के कारण मछलियों में लाल धब्बा बीमारी का प्रकोप देखने के लिए मिलता है. इसके बचाव के लिए एक लीटर एक्कानीम 100 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें.