जायद फसलों का रकबा 83 लाख हेक्टेयर पार, दालें-तिलहन में उछाल, धान में गिरावट

जायद फसलों का रकबा 83 लाख हेक्टेयर पार, दालें-तिलहन में उछाल, धान में गिरावट

देश में गर्मी की फसलों की बुवाई 83 लाख हेक्टेयर से ऊपर पहुंच गई है. दालें, तिलहन और मोटे अनाज की खेती बढ़ी है, जबकि धान के रकबे में कमी आई है.

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क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • May 19, 2026,
  • Updated May 19, 2026, 11:46 AM IST

देश में इस साल गर्मी की फसलों (जायद) की बुवाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक 15 मई 2026 तक कुल 83.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल के इसी अवधि के 80.01 लाख हेक्टेयर से 3.07 लाख हेक्टेयर अधिक है.

आंकड़ों के अनुसार, इस बार किसानों का रुझान पारंपरिक फसलों से हटकर दालों, तिलहनों और मोटे अनाज की ओर ज्यादा देखने को मिला है. धान की खेती में कमी दर्ज की गई है. इस साल 31.05 लाख हेक्टेयर में धान बोया गया है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 32.42 लाख हेक्टेयर था. यानी लगभग 1.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गिरावट आई है.

दालों की बुवाई का हाल

वहीं दालों की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. दालों का कुल रकबा बढ़कर 24.97 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 23.76 लाख हेक्टेयर था. खासतौर पर उड़द की खेती में उल्लेखनीय बढ़त देखी गई है.

मोटे अनाज यानी ‘श्री अन्न’ की खेती भी तेजी से बढ़ी है. इस वर्ग का कुल रकबा 16.01 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल 14.25 लाख हेक्टेयर था. मक्का और बाजरा की बुवाई में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है.

तिलहन फसलों का क्षेत्रफल भी बढ़कर 11.04 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 9.58 लाख हेक्टेयर था. मूंगफली की खेती में सबसे अधिक विस्तार हुआ है, इसके अलावा तिल और सूरजमुखी की बुवाई भी बढ़ी है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान खेती में बदलते पैटर्न का संकेत है, जहां किसान बेहतर दाम और कम जोखिम वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. साथ ही सरकार द्वारा दालों, तिलहनों और मोटे अनाज को बढ़ावा देने की योजनाओं का असर भी साफ दिखाई दे रहा है. कुल मिलाकर, इस साल की गर्मी फसलों की बुवाई देश में कृषि विविधीकरण और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक संकेत दे रही है.

बुवाई का आंकड़ा एक नजर में

दालें (Pulses)

2026: 24.97 लाख हेक्टेयर
2025: 23.76 लाख हेक्टेयर
बदलाव: 1.21 लाख हेक्टेयर (बढ़ोतरी)

दालों में कुल मिलाकर अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है-

मूंग (Greengram): 20.07 लाख हेक्टेयर
उड़द (Blackgram): 4.60 लाख हेक्टेयर (सबसे ज्यादा बढ़त)
अन्य दालें: 0.30 लाख हेक्टेयर

यह ट्रेंड देश में दाल उत्पादन बढ़ाने की दिशा में अच्छा संकेत देता है.

मोटे अनाज (Shree Anna / Coarse Cereals)

2026: 16.01 लाख हेक्टेयर
2025: 14.25 लाख हेक्टेयर
बदलाव: 1.77 लाख हेक्टेयर 

सबसे ज्यादा बढ़ोतरी मक्का (Maize) में हुई-

मक्का: 10.00 लाख हेक्टेयर
बाजरा: 5.40 लाख हेक्टेयर
ज्वार, रागी और छोटे मिलेट्स में भी मामूली बढ़ोतरी

सरकार द्वारा ‘श्री अन्न’ (Millets) को बढ़ावा देने का असर साफ दिख रहा है.

तिलहन (Oilseeds)

2026: 11.04 लाख हेक्टेयर
2025: 9.58 लाख हेक्टेयर
बदलाव: 1.47 लाख हेक्टेयर (बढ़ोतरी)

तिलहन फसलों में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज हुई-

मूंगफली: 5.51 लाख हेक्टेयर (सबसे ज्यादा बढ़ोतरी)
तिल (Sesamum): 5.07 लाख हेक्टेयर
सूरजमुखी: 0.39 लाख हेक्टेयर

यह बढ़ोतरी देश में खाने के तेल की आत्मनिर्भरता के लिए अच्छा संकेत मानी जा रही है.

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