
गुजरात के पाटन जिले की चाणसमा तहसील के भाटसर गांव में लगातार बारिश के बाद जलभराव ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गांव की करीब 80 प्रतिशत कृषि भूमि पानी में डूब गई है, जिससे कपास, उड़द और तुअर जैसी खरीफ फसलें खराब होने लगी हैं. किसानों का कहना है कि पिछले करीब 10 वर्षों से हर मानसून में यही स्थिति बनती है, लेकिन अब तक पानी निकासी का स्थायी समाधान नहीं किया गया है. भाटसर गांव की आजीविका मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन पर निर्भर है.
गांव में करीब 700 बीघा जमीन पर खेती होती है. इस बार मॉनसून की शुरुआत में किसानों ने कपास, उड़द और तुअर की बुवाई की थी, लेकिन बाद में हुई बारिश से आसपास के गांवों का पानी ढाल के कारण भाटसर की निचली कृषि भूमि में जमा हो गया. जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने से खेत लंबे समय से पानी में डूबे हुए हैं और फसलें सड़ने लगी हैं.
किसानों ने कहा कि भाटसर गांव की ज्यादातर खेती की जमीन निचले इलाके में है. इसी वजह से आसपास के इलाकों का बारिश का पानी यहां आकर भर जाता है. गांव की केवल करीब 20 प्रतिशत भूमि ऊंचाई पर होने के कारण वहां की फसल बची हुई है, जबकि निचले हिस्से की ज्यादातर खेती प्रभावित हो गई है. किसानों का कहना है कि हर साल इसी वजह से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.
जलभराव का असर केवल खरीफ फसलों तक सीमित नहीं है. किसानों का कहना है कि खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से रबी सीजन की तैयारी भी समय पर नहीं हो पाती. आगामी दिनों में अरंडी (कैस्टर) की बुवाई में भी देरी होने की आशंका है. अगर आगे भी तेज बारिश होती है तो बची हुई खरीफ फसल के भी पूरी तरह नष्ट होने का खतरा बढ़ जाएगा.
भाटसर गांव के किसान शैलेशभाई अंबालाल पटेल ने बताया कि आसपास के क्षेत्रों का अतिरिक्त वर्षा जल गांव की सीमा में आने से करीब दो-दो किलोमीटर तक खेतों में पानी भर गया है. उन्होंने कहा कि नहर तो बनाई गई है, लेकिन पानी निकासी के लिए नालों का निर्माण नहीं होने से बारिश का पानी खेतों में ही जमा रहता है. उन्होंने खराब हुई फसल का उचित मुआवजा देने और पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की.
एक अन्य किसान ने बताया कि करीब 400 बीघा कृषि भूमि के बीच से सड़क गुजरती है, लेकिन सड़क के नीचे पानी निकासी के लिए नाला नहीं बनाया गया. इसके कारण आसपास का वर्षा जल खेतों में भर जाता है और पूरी फसल प्रभावित हो जाती है. किसानों का कहना है कि अगर आगे भी बारिश जारी रही तो नवरात्रि के बाद ही दोबारा बुवाई संभव हो सकेगी.
भाटसर गांव के पूर्व सरपंच डाह्याभाई देसाई ने बताया कि गांव की करीब 700 बीघा कृषि भूमि पिछले 10 वर्षों से जलभराव की समस्या झेल रही है. उनका कहना है कि नर्मदा नहर बनने के बाद कई स्थानों पर पानी निकासी के लिए नालों का निर्माण नहीं किया गया, जिसके कारण बारिश का पानी खेतों में जमा हो जाता है. इससे किसानों को कई बार दोबारा बुवाई करनी पड़ती है और हर सीजन हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है.
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि विशेषज्ञों की टीम भेजकर क्षेत्र का सर्वे कराया जाए और वर्षा जल निकासी की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए. साथ ही जलभराव से खराब हुई फसलों का उचित मुआवजा भी दिया जाए, ताकि लगातार हो रहे आर्थिक नुकसान से किसानों को राहत मिल सके. (सुनील पटेल की रिपोर्ट)