धान से नहीं बदली किस्मत, गेंदा फूल की खेती ने कर दिया मालामाल! सिर्फ 0.48 हेक्टेयर में किसान ने कमाए 2 लाख रुपये

धान से नहीं बदली किस्मत, गेंदा फूल की खेती ने कर दिया मालामाल! सिर्फ 0.48 हेक्टेयर में किसान ने कमाए 2 लाख रुपये

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के किसान हेमचंद साहू ने धान की पारंपरिक खेती छोड़ गेंदा फूल की खेती अपनाई.ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक की मदद से सिर्फ 0.48 हेक्टेयर में उन्होंने करीब 2 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाकर नई मिसाल पेश की.

धर्मेंद्र सिंह
  • Raipur ,
  • Aug 03, 2026,
  • Updated Aug 03, 2026, 5:30 PM IST

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड स्थित ग्राम कसेकेरा के किसान हेमचंद साहू ने यह साबित कर दिया है कि यदि खेती में आधुनिक तकनीक और सही फसल का चयन किया जाए तो कम जमीन से भी अच्छी कमाई की जा सकती है.पारंपरिक धान की खेती से सीमित आय होने के कारण आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हेमचंद साहू ने अब गेंदा फूल की व्यावसायिक खेती से अपनी तकदीर बदल दी है. उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM) योजना के तहत उद्यानिकी विभाग के सहयोग से मात्र 0.48 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंदा फूल की खेती कर करीब 2 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है.

धान की खेती छोड़ अपनाई आधुनिक खेती

हेमचंद साहू पहले हर साल धान की खेती करते थे, लेकिन बढ़ती लागत और सीमित आमदनी के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था. ऐसे में उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर उद्यानिकी विभाग की सलाह पर गेंदा फूल की खेती शुरू करने का फैसला लिया. विभाग ने उन्हें राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया और ड्रिप सिंचाई तथा मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया.

ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से बढ़ा उत्पादन

वैज्ञानिक पद्धति से की गई खेती का असर जल्द ही दिखाई देने लगा. ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत हुई, जबकि मल्चिंग तकनीक के कारण खरपतवार कम उगे और मिट्टी में नमी बनी रही. इससे उत्पादन बढ़ा, फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई और खेती की लागत भी नियंत्रित रही. आधुनिक तकनीकों के कारण गेंदा फूल की पैदावार उम्मीद से बेहतर रही.

रायपुर तक पहुंचा फूल, मिली बेहतर कीमत

हेमचंद साहू ने अपने खेत में तैयार गेंदा फूलों की बिक्री स्थानीय बाजार के अलावा रायपुर की मंडियों में भी की. बेहतर गुणवत्ता और लगातार मांग के कारण उन्हें फूलों के अच्छे दाम मिले. पूरे सीजन में बिक्री के बाद उन्होंने लगभग 2 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया, जो धान की खेती से होने वाली आय की तुलना में कई गुना अधिक है.

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

हेमचंद साहू का कहना है कि पहले धान की खेती से परिवार की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल था, लेकिन अब फूलों की खेती ने उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत कर दी है. उनकी सफलता को देखकर आसपास के कई किसान भी गेंदा फूल की व्यावसायिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं और उद्यानिकी विभाग से जानकारी लेकर आधुनिक खेती अपनाने की तैयारी कर रहे हैं.

कम जमीन में अधिक कमाई का बेहतर विकल्प

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फूलों की खेती किसानों के लिए तेजी से लाभकारी विकल्प बन रही है. ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों से पानी की बचत होने के साथ उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है.यदि किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर वैज्ञानिक तरीके से खेती करें तो कम भूमि से भी बेहतर आय अर्जित की जा सकती है.हेमचंद साहू की सफलता इसी दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है.

 

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