नागौरी पान मेथी को मिली नई पहचान, किसानों के लिए खुलेंगे कमाई के नए रास्ते

नागौरी पान मेथी को मिली नई पहचान, किसानों के लिए खुलेंगे कमाई के नए रास्ते

राजस्थान की विश्व प्रसिद्ध नागौरी पान मेथी को भारत सरकार ने बड़ी पहचान दी है. PPV&FRA ने इसे 'सामुदायिक किस्म' के रूप में पंजीकृत कर इसका प्रमाण-पत्र नागौर जिले की मूंडवा तहसील के महिला किसान समुदाय को सौंपा है.

नागौरी पान मेथी को मिली नई पहचाननागौरी पान मेथी को मिली नई पहचान
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Aug 01, 2026,
  • Updated Aug 01, 2026, 2:28 PM IST

राजस्थान की प्रसिद्ध नागौरी पान मेथी को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है. भारत सरकार के पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) ने इसे ‘सामुदायिक किस्म’ के रूप में रजिस्टर्ड कर लिया है. इसका प्रमाण-पत्र नागौर जिले की मूंडवा तहसील के महिला किसान समुदाय को दिया गया. यह सम्मान 28 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान दिया गया. प्रमाण-पत्र PPV&FRA के अध्यक्ष डॉ. टी. महापात्र ने मूंडवा क्षेत्र की प्रतिनिधि गीता देवी और अन्य महिला किसानों को सौंपा.

क्या है नागौरी पान मेथी?

नागौरी पान मेथी, जिसे लंबे समय तक कसूरी मेथी के नाम से भी जाना जाता रहा, मेथी की एक खास प्रजाति है. इसकी खेती मुख्य रूप से राजस्थान के नागौर जिले में होती है. इसकी सबसे बड़ी पहचान इसकी तेज और लंबे समय तक बनी रहने वाली प्राकृतिक सुगंध है. यही खासियत इसे दूसरी मेथी की किस्मों से अलग बनाती है. एक्सपर्ट के अनुसार, नागौर की मिट्टी, मौसम और यहां के किसानों का पारंपरिक खेती का अनुभव इस मेथी की क्वालिटी को खास बनाता है. यही वजह है कि कई बड़ी मसाला कंपनियां वर्षों से अपने मसाला मिश्रण में इसका इस्तेमाल करती रही हैं.

नागौरी पान मेथी को मिली राष्ट्रीय पहचान

नागौर जिले के किसान करीब 70 वर्षों से इस विशेष मेथी की खेती कर रहे हैं. हालांकि, इस फसल पर वैज्ञानिक शोध और किस्म सुधार का काम बहुत कम हुआ था. अब इसे सामुदायिक किस्म के रूप में पंजीकरण मिलने से इस पारंपरिक फसल को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल गई है.

किसानों को होती है लाखों की कमाई

नागौरी पान मेथी की खेती मौजूदा समय में लगभग 7,000 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है. इसकी खेती मुख्य रूप से मूंडवा, नागौर, मेड़ता, जायल, डेगाना और खींवसर क्षेत्रों में होती है. यह एक से अधिक बार कटाई करने वाली फसल है, यानी एक ही सीजन में इसकी कई बार कटाई की जा सकती है. हर कटाई के बाद सूखी पत्तियों का अच्छा उत्पादन मिलता है. वहीं,  प्रति एकड़ करीब 175 किलोग्राम सूखी पत्तियां तैयार होती हैं, जिससे लगभग 25 हजार रुपये की आय होती है, एक सीजन में औसतन 10 कटाई होने पर किसान प्रति एकड़ लगभग 2.5 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. यही वजह है कि इसे देश की सबसे अधिक आय देने वाली पत्तेदार मसाला फसलों में गिना जाता है. वर्ष 2024-25 में नागौर जिले में करीब 30 हजार मीट्रिक टन सूखी नागौरी पान मेथी का उत्पादन हुआ, जिससे किसानों को लगभग 450 करोड़ रुपये की आय हुई.

सात साल की मेहनत के बाद मिली सफलता

नागौरी पान मेथी को सामुदायिक किस्म के रूप में पंजीकरण दिलाने में करीब सात वर्षों का समय लगा. इस काम का नेतृत्व साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC), जोधपुर ने किया. इस दौरान ICAR-राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र (NRCSS), अजमेर और नाबार्ड समर्थित कृषि निर्यात सुविधा केंद्र (AEFC) का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा. वैज्ञानिकों ने इस मेथी की पहचान, विशेष गुणों, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूलता और क्वालिटी का विस्तृत अध्ययन किया. इसके बाद सभी जरूरी दस्तावेज और बीज सामग्री के साथ आवेदन PPV&FRA को भेजा गया. वैज्ञानिक परीक्षण और नियमों की सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे महिला किसान समुदाय के नाम रजिस्टर्ड किया गया.

पहचान मिलने से किसानों को होंगे फायदे

  • इस किस्म के नाम और बीज का गलत इस्तेमाल रोकने में मदद मिलेगी.
  • किसानों के सामुदायिक अधिकार और मजबूत होंगे.
  • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में 'नागौरी पान मेथी' एक अलग ब्रांड के रूप में पहचान बना सकेगी.
  • इसके लिए वैज्ञानिक बीज मानक तैयार करने का रास्ता खुलेगा.
  • खाद्य क्वालिटी के अलग मानक विकसित करने में मदद मिलेगी.
  • भविष्य में इसके लिए अलग HSN कोड मिलने की संभावना बढ़ेगी.
  • सबसे महत्वपूर्ण बात, यह पंजीकरण GI टैग (भौगोलिक संकेतक) मिलने की दिशा में मजबूत कदम माना जा रहा है.

महिला किसानों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपलब्धि केवल एक फसल का रजिस्ट्रेशन नहीं है, बल्कि महिला किसानों के पारंपरिक ज्ञान और अधिकारों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता भी है. इससे राजस्थान की कृषि विरासत को संरक्षण मिलेगा और आने वाले समय में नागौरी पान मेथी के किसानों को बेहतर दाम, नए बाजार और निर्यात के अधिक अवसर मिल सकेंगे. यह कदम स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने और भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है.

कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद

इस कार्यक्रम में राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सी.आर. चौधरी, कृषि आयुक्त डॉ. पी.के. सिंह, PPV&FRA की बोर्ड सदस्य डॉ. सीमा शर्मा, ICAR-DKMA की निदेशक डॉ. अनुराधा अग्रवाल, PPV&FRA के रजिस्ट्रार जनरल डॉ. डी.के. अग्रवाल और साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC), जोधपुर के संस्थापक निदेशक डॉ. भागीरथ चौधरी सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे.

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