
बिहार में रबी सीजन के दौरान इस बार खेती का दायरा बढ़ाने की तैयारी है. कृषि विभाग ने पिछले साल के मुकाबले छह लाख हेक्टेयर अधिक जमीन पर रबी फसलें उगाने का लक्ष्य रखा है. वर्ष 2025-26 में करीब 42 लाख हेक्टेयर में वासंतिक फसलों की खेती हुई थी, जबकि इस बार 48 लाख हेक्टेयर में बुआई कराने की योजना है. इसके लिए किसानों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंचाने और जिलों में खेती की तैयारियों की निगरानी पर जोर दिया जा रहा है.
सोमवार को पटना में आयोजित रबी महाअभियान सह कार्यशाला में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को लक्ष्य के मुताबिक खेती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. विभाग अब जिलों से लेकर पंचायतों तक खेती की प्रगति पर नजर रखेगा.
इस सीजन में गेहूं की खेती सबसे बड़े क्षेत्र में प्रस्तावित है. इसके लिए 24 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है. वासंतिक मक्का छह लाख हेक्टेयर, दलहन पांच लाख हेक्टेयर और तिलहन चार लाख हेक्टेयर में लगाने की योजना है. आलू, सब्जियों, मसालों और दूसरी फसलों के लिए नौ लाख हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
दलहन और तिलहन का रकबा बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. मसूर, चना और सरसों जैसी फसलों के विस्तार से किसानों को फसल विविधीकरण का विकल्प मिलेगा. साथ ही, धान और गेहूं पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है.
रबी की बुआई के समय किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराना विभाग के सामने अहम जिम्मेदारी है. कृषि मंत्री ने निर्देश दिया है कि बीज की क्वालिटी से जुड़ी शिकायतों की जांच की जाए और गड़बड़ी मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो.
किसानों को बीज की उपलब्धता और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए बिहार कृषि मोबाइल ऐप सहित डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करने पर भी जोर है. विभागीय योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और किसानों को बेवजह परेशान करने वाले कर्मियों पर कार्रवाई की बात कही गई है.
खेती का रकबा बढ़ाने के साथ उत्पादन लागत कम करना भी विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है. किसानों को जीरो टिलेज, मिट्टी की जांच, संतुलित उर्वरक इस्तेमाल, हरी खाद और फसल चक्र अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. पराली जलाने से बचने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है. इन तरीकों से मिट्टी की सेहत बनाए रखने और खेती पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है. कृषि वैज्ञानिकों और अनुसंधान संस्थानों की तकनीक किसानों तक पहुंचाने की जरूरत भी रेखांकित की गई है.
कृषि क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए बीज उत्पादन, मशरूम, नर्सरी, कृषि यंत्र, ड्रोन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने की योजना है. महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है.
इसके साथ एग्रीस्टैक के तहत फार्मर आईडी तैयार कर योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है. अब चुनौती निर्धारित 48 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य को खेतों में उतारने की है. इसके लिए समय पर बीज की उपलब्धता, स्थानीय स्तर पर निगरानी और किसानों को तकनीकी सहायता मिलना जरूरी होगा.