
मालदा आम को आमों का राजा कहा जाता है. लेकिन मालदा आमों का सम्राट दीघा के दुधिया मालदा को कहा जाता है. अब इस आम के संरक्षण को लेकर कृषि विभाग सक्रिय दिख रहा है. इसको लेकर बिहार सरकार के कृषि विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (DPR) के अंतर्गत दीघा, पटना के पारंपरिक दुधिया मालदा आम के संरक्षण और संवर्धन के लिए उन्नत केंद्र की स्थापना के लिए 1.30 रुपए करोड़ की स्वीकृति दी गई है. इसके तहत दुधिया मालदा आम की मूल प्रजाति और आनुवंशिक विविधता का वैज्ञानिक संरक्षण करने के साथ किसानों को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणिक पौध सामग्री उपलब्ध कराना है.
पटना के दीघा इलाके में लगने वाले मालदा आम के बागान समय के साथ सीमित हो रहे हैं. इसका कारण दीघा इलाके में शहरीकरण, कीट-रोग, जलभराव सहित विभिन्न कारणों से बागानों का लगातार प्रभावित होना है. कभी दीघा के दुधिया मालदा आम के मूल वृक्षों की संख्या हजारों में थी, जो अब घटकर लगभग 100 तक सीमित रह गई है. विशिष्ट प्रजाति के विलुप्त होने की स्थिति को देखते हुए उन्नत केंद्र की स्थापना के तहत मूल वृक्षों की पहचान, वैज्ञानिक सर्वेक्षण, जर्मप्लाज्म संरक्षण, फील्ड जीन बैंक की स्थापना और गुणवत्तापूर्ण पौध उत्पादन की दिशा में काम किया जाएगा.
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि दुधिया मालदा आम पटना की ऐसी ही विशिष्ट पहचान है, जिसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल बचे हुए पेड़ों का संरक्षण करना नहीं है, बल्कि दुधिया मालदा की पूरी आनुवंशिक और जैविक विरासत को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित करना है. इसके लिए मूल वृक्षों की पहचान एवं GPS आधारित सर्वेक्षण किया जाएगा. वहीं, दुधिया मालदा के जर्मप्लाज्म का इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण किया जाएगा. साथ ही फील्ड जीन बैंक की स्थापना की जाएगी.
कृषि मंत्री ने बताया कि योजना की कार्यान्वयन एजेंसी बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर होगी. वहीं, परियोजना का संचालन मुख्य रूप से कृषि अनुसंधान संस्थान (ARI), पटना और नालंदा उद्यान महाविद्यालय (NCOH), नूरसराय, नालंदा के माध्यम से किया जाएगा. कृषि अनुसंधान संस्थान, पटना में मिस्ट चैंबर, शेडिंग नेट हाउस, कीटरोधी नेट हाउस, मातृ और प्रोजेनी उद्यान जैसी आधारभूत संरचनाएं विकसित की जाएंगी. वहीं, GPS सर्वेक्षण, जर्मप्लाज्म संकलन और पौध प्रवर्धन का काम किया जाएगा. जबकि नालंदा उद्यान महाविद्यालय, नूरसराय में फील्ड जीन बैंक की स्थापना, फेंसिंग, फल मूल्यांकन, किसान प्रशिक्षण और तैयार पौधों के संग्रहण और बिक्री से संबंधित काम किए जाएंगे.
कृषि मंत्री ने कहा कि परियोजना को तीन वर्षों की कार्ययोजना के तहत आगे बढ़ाया जाएगा. प्रथम वर्ष में आधारभूत संरचना की स्थापना, GPS सर्वेक्षण और जर्मप्लाज्म संकलन का काम किया जाएगा. दूसरे वर्ष में वैज्ञानिक मूल्यांकन एवं ग्राफ्टिंग और PPV&FRA मानकों के अनुसार काम किया जाएगा. इसके साथ Growers' Association के गठन और दुधिया मालदा को GI टैग दिलाने की दिशा में भी आवश्यक काम किया जाएगा. उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध होने से किसानों के बीच दुधिया मालदा के व्यवस्थित विस्तार का रास्ता साफ होगा.