
सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी. इनमें सबसे प्रमुख फैसला राज्य पशुधन मिशन (एसएलएम) का रहा. सरकार का मानना है कि इससे पशुपालन किसानों की आमदनी और ग्रामीण युवाओं के रोजगार का मजबूत जरिया बनेगा. मिशन के जरिए सरकार पशुधन अर्थव्यवस्था को संगठित स्वरूप देना चाहती है. इसे आधुनिक तकनीक, उद्यमिता और वैश्विक व्यापार से जोड़ा जाएगा. योजना में खास तौर पर लघु एवं सीमांत किसानों और उद्यमियों को प्राथमिकता दी जाएगी.
पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक पशुधन वाला राज्य है. उन्होंने बताया कि दुग्ध उत्पादन में भी प्रदेश पहले स्थान पर है. मंत्री के अनुसार अब मिशन के माध्यम से उत्पादकता, बाजार व्यवस्था, मूल्य संवर्धन और डिजिटल प्रबंधन को आगे बढ़ाया जाएगा.
मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में पशुपालन की अहम भूमिका है. उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहली बार राज्य पशुधन मिशन को मंजूरी दी गई है. इसमें साहीवाल, देसी और हरियाणवी जैसी उन्नत नस्लों के विकास पर विशेष जोर रहेगा. एक उन्नत गाय के लिए 40 हजार रुपये और दो गायों के लिए 80 हजार रुपये की सब्सिडी का प्रावधान है. बकरी, भेड़, सूअर और मुर्गी पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. जरूरतमंद परिवारों को सौ-सौ चूजे उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी है.
पशुधन मंत्री ने बताया कि मिशन को पांच उप-मिशनों के जरिए लागू किया जाएगा. इनमें पशुधन उद्यमिता एवं स्टार्टअप विकास, पशुधन एवं पोल्ट्री नस्ल विकास, नवाचार एवं डिजिटल लाइवस्टॉक, चारा एवं आहार विकास और अनुसंधान, वैश्वीकरण और ज्ञान प्रणाली विकास शामिल हैं. इनसे लाइवस्टॉक स्टार्टअप, चारा उत्पादन, मूल्य संवर्धन, उत्पादक संगठनों और सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी.
मिशन में एआई, डिजिटल ट्रेसबिलिटी और जलवायु अनुकूल तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर रहेगा. इसका उद्देश्य पशुधन उत्पादों की गुणवत्ता सुधारना और उनकी बाजार तक पहुंच बढ़ाना है. पशुपालकों के कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.
मंत्री ने बताया कि यह राज्य वित्तपोषित योजना है. निर्धारित माइलस्टोन पूरे होने, स्क्रीनिंग समिति की प्रक्रिया और पीएसी की स्वीकृति के बाद चयनित परियोजनाओं का अनुदान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जाएगा. इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और सेवाओं के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल को भी प्रोत्साहित किया जाएगा.