
देशभर में इन दिनों बढ़ते तापमान ने पोल्ट्री पालन करने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है.भीषण गर्मी और लू के कारण ब्रॉयलर मुर्गियों में हीट स्ट्रेस और हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. तापमान अधिक होने पर मुर्गियां दाना कम खाती हैं, पानी ज्यादा पीती हैं और उनकी वृद्धि पर सीधा असर पड़ता है. कई बार स्थिति गंभीर होने पर मृत्यु दर भी बढ़ जाती है.विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते उचित प्रबंधन न किया जाए तो पोल्ट्री फार्म को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा ,आजमगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ एल सी वर्मा ने बताया कि मुर्गियों के लिए आदर्श तापमान 18 से 22 डिग्री सेल्सियस माना जाता है, लेकिन गर्मियों में यह 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है.ऐसे में पोल्ट्री फार्म में विशेष सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो जाता है.
डॉ एल सी वर्मा के अनुसार मुर्गी शेड के आसपास छायादार पेड़ होने चाहिए ताकि सीधे सूर्य की गर्मी कम पहुंचे. यदि अधिक गर्मी हो तो शेड की छत पर जूट की बोरियां, घास-फूस या अन्य इंसुलेटिंग सामग्री डालकर उस पर पानी का छिड़काव करना चाहिए. इससे शेड का तापमान 5 से 10 डिग्री सेल्सियस तक कम किया जा सकता है.
उन्होंने बताया कि शेड में हवा का सही प्रवाह बेहद जरूरी है. इसके लिए सभी खिड़कियां खुली रखें ताकि गर्म हवा और अमोनिया गैस बाहर निकल सके.साथ ही पंखे और फॉगर्स का इस्तेमाल करने से भी तापमान नियंत्रित करने में मदद मिलती है.
डॉ. वर्मा ने सलाह दी कि गर्मी के मौसम में प्रति वर्ग फुट मुर्गियों की संख्या 10 से 20 प्रतिशत तक कम कर देनी चाहिए . अधिक भीड़ होने पर मुर्गियों को पर्याप्त हवा नहीं मिल पाती, जिससे हीट स्ट्रेस बढ़ जाता है.
गर्मी में मुर्गियां सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पानी पीती हैं. इसलिए पानी के बर्तनों की संख्या बढ़ा देनी चाहिए. पानी हमेशा छाया में रखा जाए और उसका तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से कम रखने की कोशिश करें.
विशेषज्ञों का कहना है कि पानी में विटामिन-C, विटामिन-E, सेलेनियम और इलेक्ट्रोलाइट्स मिलाने से मुर्गियों को गर्मी से राहत मिलती है. 0.2 से 0.3 प्रतिशत नमक या पोटेशियम मिलाने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और हीट स्ट्रेस कम होता है.
गर्मी के दौरान सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक मुर्गियों को दाना नहीं देना चाहिए, क्योंकि इस समय तापमान सबसे अधिक रहता है. चारा सुबह जल्दी या देर शाम देना बेहतर माना जाता है.
गर्मी में मुर्गियां कम दाना खाती हैं, इसलिए उनके आहार में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने की जरूरत होती है. चारे में प्रोटीन और ऊर्जा की मात्रा संतुलित रखनी चाहिए. साथ ही थोड़ा वसा बढ़ाकर और फाइबर कम करके पाचन को बेहतर बनाया जा सकता है.
फर्श पर बिछावन की मोटाई 2 से 3 इंच तक ही रखनी चाहिए. ज्यादा मोटा बिछावन गर्मी को अधिक सोखता है, जिससे शेड का तापमान बढ़ जाता है.
पशुपालन वैज्ञानिक आदित्य कुमार ने बताया कि टीकाकरण, चोंच काटने या मुर्गियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने जैसे कार्य केवल सुबह या देर शाम के ठंडे समय में ही करने चाहिए.
उन्होंने कहा कि यदि मुर्गियां हांफ रही हों, चोंच खोलकर सांस ले रही हों या पंख फैला कर बैठी हों तो यह हीट स्ट्रेस के संकेत हैं.ऐसी स्थिति में तुरंत उन पर पानी का हल्का छिड़काव करें और पंखे के नीचे रखें.
विशेषज्ञों के मुताबिक, भीषण गर्मी में ब्रॉयलर मुर्गियों को बचाने के लिए ठंडा पानी, संतुलित आहार और पर्याप्त वेंटिलेशन सबसे जरूरी उपाय हैं. सही प्रबंधन अपनाकर किसान गर्मी में होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं.