
उत्तर प्रदेश में लंपी स्किन डिजीज (LSD) के संभावित प्रकोप की रोकथाम, नियंत्रण एवं बचाव को लेकर पशुपालन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं. निदेशक रोग नियंत्रण एवं फार्म डॉ. इंद्रमणि चौधरी ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज गोवंश में होने वाली एक संक्रामक बीमारी है, जो मक्खियों, मच्छरों और किलनी के काटने से फैलती है. वहीं,पशुओं में तेज बुखार, त्वचा पर 1-5 सेमी की कठोर गांठें, दूध में गिरावट और आंख-नाक से स्राव इसके प्रमुख लक्षण हैं.
उन्होंने बताया कि बचाव के लिए समय पर वैक्सीन लगवाएं और बाड़े में कीटनाशकों का छिड़काव करें. वहीं, लक्षण दिखने पर पशु चिकित्सक की सलाह से ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक और मल्टीविटामिन दें.
जबकि बीमार पशु को आइसोलेट करें और सुपाच्य आहार व साफ पानी दें. पशुपालन विभाग ने किसानों से टीकाकरण करवाने की अपील की है.
डॉ. इंद्रमणि चौधरी ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज से संबंधित किसी भी सूचना की निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई के लिए बहुउद्देशीय प्रदेश के पशु चिकित्सालय में जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है. इसके माध्यम से जिले में बीमारी की स्थिति पर नजर रखने के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने बताया कि किसानों और पशुपालकों से अपील की है कि यदि किसी पशु में लंपी स्किन डिजीज के लक्षण दिखाई दें तो उसे अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग रखा जाए और तत्काल पशु चिकित्सा विभाग को सूचना दी जाए. संक्रमित अथवा संदिग्ध पशुओं के उपचार के साथ-साथ उनके आइसोलेशन की व्यवस्था भी की जा रही है, जिससे बीमारी को अन्य पशुओं में फैलने से रोका जा सके.
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