World Fisheries Day: मछली पालकों के लिए समुद्र की 5 चुनौतियों से निपटेगी सरकार, बढ़ेगा मुनाफा

World Fisheries Day: मछली पालकों के लिए समुद्र की 5 चुनौतियों से निपटेगी सरकार, बढ़ेगा मुनाफा

वर्ल्ड फिशरीज डे के मौके पर FAO, रोम ने भूख और कुपोषण की वैश्विक चुनौतियों पर जोर दिया. वहीं बढ़ती आबादी को खिलाने के लिए नए समाधानों की जरूरत पर रोशनी डाली. कार्यक्रम के दौरान एफएओ की ब्लू ट्रांसफॉर्मेशन पहल प्रस्तुत की गई, जिसमें जलीय कृषि विकास, प्रभावी मछली प्रबंधन और एक्वाटिक फूड वैल्यू सीरिज बढ़ाने पर फोकस किया गया. 

नासि‍र हुसैन
  • NEW DELHI,
  • Nov 21, 2024,
  • Updated Nov 21, 2024, 7:18 PM IST

इनलैंड फिशरीज (मछली पालन) ने समुद्र से पकड़ी जाने वाली मछली के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया है. साल 2014 के बाद से मछली पालन का आंकड़ा दोगुना होकर उत्पादन 175 लाख टन पर पहुंच गया है. जबकि समुद्री मछली पकड़े जाने का आंकड़ा 13 लाख टन है. और ये सब मुमकिन हुआ है पीएम नरेन्द्र मोदी की नीली क्रांति और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना (PM-MKSSY) योजनाओं की बदौलत. ये कहना है केंद्रीय मंत्री, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का. वर्ल्ड फिशरीज डे के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राजीव रंजन सिंह ने ये बात कही. 

वहीं उनका कहना था कि आज समुद्री में मछली पकड़ने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. केन्द्र सरकार मछुआरों की इन्हीं चुनौतियों को दूर करने और उनका मुनाफा बढ़ाने के लिए काम कर रही है. खासतौर पर पांच तरह की समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए तैयारी चल रही है. जैसे प्लास्टिक प्रदूषण, पारंपरिक मछली पकड़ने से कार्बन उत्सर्जन और जल प्रदूषण, प्लास्टिक को कम करने, पानी की गुणवत्ता में सुधार और पर्यावरण संरक्षण बड़ी चुनौती हैं. 

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शुरू हो गई समुद्री मछलियों की गिनती, शार्क बचाने पर होगा काम 

वर्ल्ड फिशरीज डे के मौके पर राजीव रंजन सिंह ने समुद्री मछली की गणना का भी शुभारंभ किया है. पहली बार मछलियों की गिनती के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा. वहीं शार्क मछली के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना और श्रीलंका, बांग्लादेश और मालदीव के सहयोग से बंगाल की खाड़ी में अवैध शि‍कार और अप्रतिबंधित मछली और अनियमित (IUU) तरीके से पकड़ने को रोकने  की क्षेत्रीय कार्य योजना के लिए केन्द्र सरकार का समर्थन, समुद्री प्लास्टिक कूड़े से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन-खाद्य और कृषि संगठन (IMO-FAO) ग्लोलिटर भागीदारी परियोजना, ऊर्जा-कुशल, कम लागत वाले समुद्री मछली पकड़ने के ईंधन को बढ़ावा देने के लिए रेट्रोफिटेड LPG किट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP)  आदि पर काम की शुरुआत की गई. इसके साथ ही तटीय जलीय कृषि प्राधिकरण द्वारा नई एकल खिड़की प्रणाली (NSWS) का शुभारंभ किया गया जिससे तटीय जलीय कृषि फार्मों का ऑनलाइन पंजीकरण आसानी से हो सके. 

सीवीड और मोती की खेती से बदलेगी तस्वीर

इस मौके पर राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि आज दुनिया भर में छोटे पैमाने के मछुआरों पर बात हो रही है ये एक अच्छा कदम है. छोटे मछुआरों के लिए मछली स्टॉक कायाकल्प, हानिकारक मछली पकड़ने के तरीकों पर प्रतिबंध लगाने और समुद्री शैवाल की खेती को बढ़ावा देने के प्रयास शामिल हैं. सेक्रेटरी, फिशरीज डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि लाखों लोगों के लिए भोजन, आजीविका और समावेशी विकास प्रदान करने में मछली पालन और जलीय कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने बताया कि आज प्रमुख प्राथमिकताओं में स्थायी जलीय कृषि का विस्तार, मूल्यवर्धित निर्यात को बढ़ाना, अनुसंधान और डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाना, आसान ऋण, समुद्री शैवाल (सीवीड) और मोती की खेती जैसे विकल्प से मछुआरों की तस्वीर बदल सकती है. 

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बेहतर मछली पालन के लिए राज्य हुए सम्मानित 

ज्वाइंट सेक्रेटरी, फिशरीज सागर मेहरा ने बताया कि इस मौके पर भारत में मछली पालन और जलीय कृषि क्षेत्र के विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रगतिशील राज्यों, संघ शासीत राज्य, जिलों और व्यक्तियों को सम्मानित किया गया. केरल को सर्वश्रेष्ठ समुद्री राज्य का पुरस्कार मिला, वहीं तेलंगाना को सर्वश्रेष्ठ इनलैंड फिशरीज के लिए सम्मानित किया गया. उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ठ हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्य का खिताब मिला, जम्मू और कश्मीर को सर्वश्रेष्ठ केंद्र शासित प्रदेश का पुरस्कार मिला. जिलों में केरल के कोल्लम ने सर्वश्रेष्ठ समुद्री जिला का पुरस्कार जीता, छत्तीसगढ़ के कांकेर को सर्वश्रेष्ठ इनलैंड फिशरीज का जिला घोषि‍त किया गया. वहीं असम के दरांग को सर्वश्रेष्ठ हिमालयी और पूर्वोत्तर जिला पुरस्कार मिला, जम्मू-कश्मीर के कुलगाम को केंद्र शासित प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ जिले के रूप में सम्मानित किया गया.

 

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