Animal Care in Summer: जून में पशुओं को भूसा-हरा चारा और पानी खि‍लाने-पिलाने का ये है तरीका

Animal Care in Summer: जून में पशुओं को भूसा-हरा चारा और पानी खि‍लाने-पिलाने का ये है तरीका

Animal Care in Summer पशुओं के पीने के पानी का बहुत ख्याल रखना चाहिए. हरा चारा भी पानी की कमी को पूरा करता है. इस दौरान पशुओं को पानी पिलाने और सुबह-शाम नहलाने में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, वर्ना पशु हीट स्ट्रेस और हीट स्ट्रोक की चपेट में आ सकता है. 

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नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • May 26, 2026,
  • Updated May 26, 2026, 10:43 AM IST

मई के बाद जून ऐसा महीना है जब गर्मी अपने चरम पर होती है. दिन के साथ-साथ रात में भी गर्म हवाएं चलती हैं. ऐसे में पशुओं के हीटवेव की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है. पशुओं में पानी की कमी भी हो जाती है. ऐसे मौसम में सबसे ज्यादा दुधारू पशुओं को बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है. इसलिए ये बहुत जरूरी हो जाता है कि गर्मी के दौरान पशुओं यानि गाय-भैंस को कब चारा खि‍लाएं और कब, कैसे और कितना पानी पिलाएं. पशुओं को गर्मी से राहत पहुंचाने के लिए कब उन्हें नहलाया जाए. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो पशुओं की देखभाल के मामले में ये वक्त पशुपालकों के लिए बहुत ज्यादा अलर्ट रहने वाला होता है. 

क्योंकि इस दौरान पशु हीट स्ट्रोक और हीट स्ट्रेस की चपेट में भी आ सकता है. गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए साफ और ताजा पानी पीना बहुत जरूरी होता है. पानी ना पीने पर कई तरह की परेशानी हो सकती है. पशुओं के कई ऐसे लक्षण हैं जो शरीर में पानी की कमी को बताते हैं. लेकिन पीने के पानी का ख्याल रखा जाए तो पशु को बीमार होने और उत्पादन कम होने के नुकसान से बचा जा सकता है. 

पानी, सूखा-हरा चारा खि‍लाने का तरीका 

  • पशुओं को भूसा 30 फीसद और हरा चारा 70 फीसद तक खिलाएं. 
  • पशुओं को नया भूसा खिलाने से पहले उसे भिगो लें. 
  • शाम को भिगोकर रखा गया भूसा सुबह ही खिलाएं. 
  • बिना भि‍गोए खि‍लाया गया भूसा गर्मी पैदा करता है. 
  • पशु के सामने हमेशा नमक की ढेली रखें. 
  • पशु नमक चाटता है तो इससे प्यास लगती है. 
  • पशुओं को दोपहर के वक्त छायादार जगह में बांधें. 
  • पानी की कमी होते ही पशु को नमक-चीनी का घोल दें. 
  • पशुओं के सामने पानी रखा रहने दें, जिससे जब चाहें पीएं. 
  • गर्मियों में पशुओं को ताजा और ठंडा पानी ही पिलाएं.
  • पशुओं के शरीर पर दिन में कम से कम तीन बार पानी छिड़कें. 
  • गर्मियों में पशुओं को सुबह-शाम नहलाना बहुत जरूरी है. 
  • जहां पशु बांधे जाते हैं वहां भी पानी का छिड़काव करें.

पानी की कमी पहचान कर करें इलाज 

जब पशुओं में पानी की कमी हो जाती है तो कई तरह के लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है. जैसे पशुओं को भूख नहीं लगती है. सुस्ती और कमजोर हो जाना. पेशाव गाढ़ा होना, वजन कम होना, आंखें सूख जाती हैं, चमड़ी सूखी और खुरदरी हो जाती है और पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. और सबसे बड़ी पहचान ये है कि जब हम पशु की चमढ़ी को उंगलियों से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो वो थोड़ी देर से अपनी जगह पर वापस आती है.

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