Water for Animal: पशुओं में पानी की कमी की पहचान का ये है तरीका, ये होते हैं नुकसान 

Water for Animal: पशुओं में पानी की कमी की पहचान का ये है तरीका, ये होते हैं नुकसान 

Water for Animal गर्मियों में पानी की कमी के चलते पशुओं को सबसे बड़ी डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रैस जैसी बीमारी का सामना करना पड़ता है. वहीं एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि गर्मियों के दौरान पशुओं को हरा चारा खूब खि‍लाना चाहिए. एक किलो हरे चारे से पशु में तीन से चार लीटर तक पानी की कमी पूरी हो जाती है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • May 27, 2026,
  • Updated May 27, 2026, 8:00 AM IST

खासतौर पर उत्तर भारत के राज्य राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी अपना असर दिखा रही है. कई जगह पर तापमान 45 डिग्री को भी पार कर चुका है. जबकि दुधारू पशु यानि गाय-भैंस के लिए 30 से 35 डिग्री ऊपर का तापमान नुकसानदायक माना जाता है. ऐसे में पशु हीटवेव की चपेट में आकर कई तरह की परेशानियों से घि‍र जाता है. सबसे बड़ी परेशानी शरीर में पानी की कमी की होती है. शरीर में होने वाली पानी की कमी कई दूसरी परेशानियों को न्यौता देने वाली होती है. पानी की कमी का असर पशु के दूध उत्पादन पर भी पड़ता है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो कई लक्षणों को देखकर पशु में पानी की कमी  की पहचान की जा सकती है. 

गर्मी में पशुओं के लिए साफ और ताजा पानी पीना बहुत जरूरी है. पानी ना पीने पर किस तरह की परेशानी हो सकती है, उसके लक्षण क्या हैं और परेशानी होने पर किस तरह के नुकसान उठाने पड़ सकते हैं. लेकिन, अगर पानी का ख्याल रखा जाए तो पशु को बीमार होने और उत्पादन कम होने के नुकसान से बचा जा सकता है. 

ये हैं पानी की कमी के लक्षण 

जब पशुओं में पानी की कमी हो जाती है तो कई तरह के लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है. जैसे पशुओं को भूख नहीं लगती है. सुस्ती और कमजोर हो जाना. पेशाव गाढ़ा होना, वजन कम होना, आंखें सूख जाती हैं, चमड़ी सूखी और खुरदरी हो जाती है और पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. और सबसे बड़ी पहचान ये है कि जब हम पशु की चमढ़ी को उंगलियों से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो वो थोड़ी देर से अपनी जगह पर वापस आती है. 

पानी कम पिलाने के नुकसान 

पानी की कमी होने पर पशुओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जैसे चारा खाने और उसे पचाने की क्षमता कम हो जाती है. शरीर के जरूरी पोषक तत्वा मल-मूत्र के जरिए बाहर निकलने लगते हैं. पशुओं की दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ने लगता है. खून गाढ़ा होने लगता है. बछड़े और बछड़ियों को पेचिस लग जाती है. बड़े पशुओं को दस्त लग जाते हैं.

पशुपालकों और पर्यावरण तक के लिए ऐसे फायदेमंद है वाइट रेवोलुशन-2

गर्मियों में भी खूब होगा मछली उत्पादन, गडवासु के फिशरीज एक्सपर्ट ने दिए टिप्स 

MORE NEWS

Read more!