
गर्मियों की सुबह-शाम को पालतू कुत्तों के लिए अच्छा माना जाता है. सुबह-शाम बाहर समय बिताना, कसरत करने और मनोरंजन के लिए अच्छा वक्त होता है. लेकिन बढ़ता तापमान कुत्तों की सेहत के लिए खतरा पैदा कर सकता है. इसलिए घुमाने के साथ ही उन्हें तेज गर्मी और बढ़ते तापमान से बचाना भी जरूरी हो जाता है. ये कहना है कि गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, लुधियाना के टीचिंग वेटरनरी क्लिनिकल कॉम्प्लेक्स विभाग के प्रोफेसर डॉ. राज सुखबीर सिंह का. साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) गर्मियों के दौरान कुत्तों में होने वाली आम और बड़ी परेशानियों में से एक है.
कई बार पीने का पानी उपलब्ध होने के बाद भी कुत्ते गर्मी का ज्यादा शिकार होते हैं. क्योंकि कुत्तों के शरीर का सामान्य तापमान 100.5°F से 102.5°F के बीच होता है, और इसी तापमान को कंट्रोल करने के लिए कुत्ते हांफकर यानि तेज-तेज सांस लेकर और त्वचा की रक्त वाहिकाओं (Blood vessels) से गर्मी निकालने की कोशिश करते हैं.
जब किसी कुत्ते के शरीर का तापमान बढ़ने लगता है, तो उसे जानलेवा माना जाता है. ऐसे हालात में पालतू जानवरों के मालिकों को फौरन ही पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. कुत्ते को ठंडे पानी से ठंडा करना शुरू कर देना चाहिए. खासतौर पर कुत्ते की जांघों, कांखों और गर्दन के आस-पास मालिश करनी चाहिए. ठंडे पानी या बर्फ से मालिश करनी चाहिए.
ज्यादा देर तक मालिश नहीं करनी चाहिए. नहीं तो रक्त वाहिकाओं के सिकुड़ने का डर रहता है. ऐसा होने पर शरीर की गर्मी बाहर निकलने में देरी हो सकती है. कुत्तों को ठंडा रखने के लिए पंखों या कार के एयर वेंट्स का इस्तेमाल किया जाए और उसे थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ठंडा पीने का पानी दिया जाना चाहिए.
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