Parasite Treatment: गर्मी के साथ ही शुरू हो जाता है मक्खी-मच्छर, चिचड़ का हमला, अपनाएं ये उपाय 

Parasite Treatment: गर्मी के साथ ही शुरू हो जाता है मक्खी-मच्छर, चिचड़ का हमला, अपनाएं ये उपाय 

Parasite Treatment साइंस की भाषा में परजीवी रोग (पैरासाइटिक डिसीज) कहा जाता है तो पशुपालक उसी को मच्छर-मक्खी, जोंक, किलनी के नाम से जानता है. खासतौर पर बरसात और बाढ़ के बाद ये पशुओं पर हमला करते हैं, लेकिन अब इनका असर गर्मियों में भी देखने को मिलता है. इनके चलते पशु बीमार तो होते ही हैं साथ में उत्पादन भी घटने लगता है.

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Mar 11, 2026,
  • Updated Mar 11, 2026, 8:42 AM IST

पशुओं के लिए गर्मी के साथ ही मक्खी-मच्छर, चिचड़ का प्रकोप भी शुरू हो जाता है. मेडिकल की भाषा में इन्हें वेक्टर भी कहा जाता है. गाय-भैंस के लिए ये वो परेशानी है जिसके चलते उत्पादन तो घटता ही है, साथ में इसका बड़ा असर पशुओं की सेहत पर भी देखने को मिलता है. ये कई छोटी-बड़ी बीमारियों की वजह भी होते हैं. इसमे से कुछ तो इतने खतरनाक होते हैं कि ये पशुओं के खून में भी शामिल हो जाते हैं. वैसे तो ऐसा माना जाता है कि बरसात के दिनों में ये ज्यादा सक्रिेय होते हैं, लेकिन ये भी सच्चाई है कि अब इनका प्रकोप गर्मियों में भी देखा जाता है. इसलिए ये जरूरी है कि पशुओं को इनसे बचाने के लिए एक्सपर्ट के बताए टिप्स अपनाएं जा सकते हैं.
 
घर पर भी घरेलू उपाय किए जा सकते हैं. मच्छर-मक्खी, जोंक, किलनी से पशुओं को होने वालीं बीमारियां हमेशा से ही पशुपालकों की बड़ी परेशानी रही हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक ये परेशानी अब और बड़ी हो गई है. अभी तक परजीवी रोगों का इलाज कुछ खास तरह की दवाई देकर हो जाता था. लेकिन अब परेशान करने वाली बात ये है कि बीते कुछ वक्त से दवाईयां भी पशुओं पर असर नहीं कर रही हैं. जिसकी बड़ी वजह परजीवी विरोधी प्रतिरोध (एंटीपैरासिटिक रेसिस्टेंस) है. 

परजीवीयों पर इसलिए दवाई नहीं कर रही असर 

दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल (ओवरयूज). एंटीपैरासिटिक दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल और उस पर कंट्रोल ना होना परजीवियों में प्रतिरोधकता बढ़ने की एक बड़ी वजह है. सही तरह से दवाई ना लेना, पशुओं को सही तरीके से दवाई ना देना, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाई का पूरा कोर्स ना करना भी एक वजह है. पर्यावरणीय और जैविक कारण भी हैं. परजीवियों की प्राकृतिक चयन प्रक्रिया और उनके जीन में होने वाले बदलाव भी प्रतिरोधकता का कारण बन रहे हैं.

परजीवी विरोधी प्रतिरोध को ऐसे रोकें

  • केवल पशु चिकित्सक की सलाह पर ही पशुओं को एंटीपैरासिटिक दवाई खि‍लाएं. 
  • पशुओं के लिए डाक्टर के बताए कृमिनाशक शेडयूल का पालन करें.
  • पशुचिकित्सक द्वारा बताई गई दवाओं के कोर्स को पूरा करें.
  • दवाई की डाक्टर द्वारा बताई गई डोज ही दें, कम या ज्यादा मात्रा ना दें.
  • पशुओं का इलाज नीम-हकीमों से ना करवायें.
  • दवा का इस्तेमाल करने से पहले ड्रग लेबल पर दिए गए निर्देशों को पढ़ लें.
  • एक ही पशु में परजीवी रोधी दवाओं को सालाना बदलें.
  • परजीवी विरोधी प्रतिरोधकता पर शैक्षिक और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दें.
  • अपने फार्म में कृमि नियंत्रण का पूरा रिकॉर्ड रखें.
  • पशुओं में परजीवी नियत्रंण के लिए एथनोवेटरनरी दवाई (ईवीएम) का इस्तेमाल करें.

दवाई के मामले में याद रखें ये बातें 

  • डाक्टर के अलावा किसी और की सुझाई गई परजीवी विरोधी दवाई पशुओं को ना खि‍लाएं.
  • लगातार एक जैसी दवाई पशुओं को ना खि‍लाएं. 
  • कभी भी पशुओं को खुद से कोई दवाई ना दें.
  • पशुओं में सामूहिक कृमिनाशन न करें.
  • खुद के अनुभव के आधार पर स्टोर से दवाई खरीदकर पशुओं को ना खि‍लाएं.

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