World Veterinary Day: बढ़ती आबादी के लिए इतने दूध की है जरूरत, दूर करनी होंगी ये परेशानी 

World Veterinary Day: बढ़ती आबादी के लिए इतने दूध की है जरूरत, दूर करनी होंगी ये परेशानी 

कृषि क्षेत्र में डेयरी सेक्टर का योगदान 24 फीसद है, जिसकी वैल्यू करीब 10 लाख करोड़ रुपये है. और दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले ये सबसे ज्यादा है. अच्छी बात ये है कि देश के वेटरिनेरियन प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ाने पर लगातार काम कर रहे हैं. उत्पादन पर असर डालने वाली बीमारियों को कंट्रोल करने के लिए पशुपालकों को जागरुक करने का काम भी कर रहे हैं. 

milk production uttar pradesh set new record till now 25000 crore rupees investment in dairy sector यूपी के दुग्ध उत्पादकों और निवेशकों की चमकी किस्मतmilk production uttar pradesh set new record till now 25000 crore rupees investment in dairy sector यूपी के दुग्ध उत्पादकों और निवेशकों की चमकी किस्मत
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Apr 24, 2026,
  • Updated Apr 24, 2026, 10:00 AM IST

भारत दूध उत्पादन में नंबर वन है. वहीं दूसरे और तीसरे नंबर वाले देश दूध उत्पादन के आंकड़े में भारत से बहुत पीछे हैं. करीब 27 साल भारत दूध उत्पादन के मामले में नंबर वन है. देश में पशुओं की संख्या भी दूसरे देशों के मुकाबले ज्यादा है. हर साल दूध उत्पादन बढ़ रहा है, लेकिन उतना नहीं जितनी जरूरत है. राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई), करनाल के डॉयरेक्टर इस बारे में चेतावनी भी जारी कर चुके हैं. उनका कहना है कि दूध की बढ़ती डिमांड को देखते हुए साल 2033 तक हमे वर्तमान उत्पादन से ज्यादा दूध की जरूरत है. क्योंकि साल 2033 तक ये डिमांड और ज्यादा बढ जाएगी.

आज भी भारत दूध उत्पादन के मामले में नंबर वन है. बीते साल 24 करोड़ टन दूध का उत्पादन हुआ था. वहीं प्रति व्यक्ति के हिस्से में अब 471 ग्राम दूध आ रहा है. और ये सब मुमकिन है ऑपरेशन फ्लड से. डेयरी सेक्टर में करोड़ों छोटे और सीमांत किसान शामिल हैं. वहीं भारत के सकल घरेलू उत्पाद में डेयरी और पशुपालन सेक्टर का 4.5 फीसद योगदान है. 

जरूरत है 33 करोड़ टन दूध की 

राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई), करनाल के डॉयरेक्टर डॉ. धीर का कहना है कि भारत अब दुनिया में सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन गया है. इतना ही नहीं हमारी आबादी में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. बढ़ती आबादी के चलते दूध और दूध उत्पादों की मांग भी लगातार बढ़ रही है. एक अनुमान के अनुसार, देश की दूध और दूध उत्पादों की मांग को पूरा करने के लिए भारत को साल 2033 तक हर साल 33 करोड़ टन दूध का उत्पादन करने की जरूरत है. हाल के दशक में दूध उत्पादन में औसत बढ़ोतरी 6.6 फीसद हुई है. लेकिन 33 करोड़ टन दूध की डिमांड को पूरा करने के लिए कम से कम 14 फीसद वार्षिक बढ़ोतरी दर हासिल करने की जरूरत है. 

पशुपालन-डेयरी आ रहीं ये परेशानी 

डॉ. धीर जहां एक ओर साल 2033 तक हर साल 33 करोड़ टन दूध उत्पादन की जरूरत बताई है, वहीं इस लक्ष्य को हासिल करने में आने वाली रुकावटों का भी जिक्र किया है. उनका कहना है कि चारे की बढ़ती लागत, कम होती खेती की जमीन, पशुओं में उभरती हुई बीमारियां आदि कुछ ऐसी बाधाएं हैं जो लक्ष्य को हासिल करने के बीच में रोड़ा बन रही हैं. उत्पादन लागत और मीथेन उत्पादन को कम करने के लिए स्वदेशी दुधारू नस्लों की उत्पादकता बढ़ाना भी एक लक्ष्य है जिस पर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की जरूरत है.

मौजूदा वक्त में भारत का दूध निर्यात करीब 2269 करोड़ रुपये का है, जो दुनिया के दूध उत्पाद निर्यात का केवल 2.6 फीसद है. फिर भी, हमें अपने दूध उत्पादों की निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए और ज्यादा काम करने की जरूरत है, जो किसानों को उनकी इनकम बढ़ाने और अच्छा रिटर्न दिलाने के लिए बहुत खास है. गुणवत्ता में सुधार के अलावा हमारी निर्यात क्षमता को बढ़ाने के लिए भारतीय दूध निर्यात के लिए नए रास्ते तलाशने की भी जरूरत है.

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