बरसात वो मौसम है जो पशुओं के लिए भरपूर हरा चारा लेकर आता है. लेकिन कई बार यही हरा चारा पशुओं को नुकसान भी पहुंचाने लगता है. क्योंकि जब पशु बरसात के दिनों में बाहर खुले में चरने जाते हैं तो वहां बहुत सारी खरपतवार भी होती है. कुछ खरपतवार तो ऐसी भी हैं जो पशुओं की जान तक ले लेती हैं. ये खरपतवार पशुओं के चारे के बीच उग आती हैं. फोडर एक्सपर्ट की मानें तो पंक्चरवाइन ऐसी खरपतवार होती है जो पशुओं के शरीर में छेद तक कर देती है.
गाय-भैंस और भेड़-बकरियां जब खेत, खुले मैदान और जंगल में चरने जाते हैं तो वो हर तरह की हरी पत्तियां, फल और तने को खाते हैं. ऐसे में पशु के चरने के दौरान उसमे खरपतवार भी शामिल हो जाती है. हालांकि ऐसा नहीं है कि सभी तरह की खरपतवार पशुओं को नुकसान पहुंचाती हैं. कुछ ऐसी भी खरपतवार होती हैं जिन्हें पशु खूब मजे से खाते हैं और वो फायदा भी पहुंचाती हैं.
खरपतवार खाने से हो जाता है गर्भपात
- लैंटाना कैमरा की पत्तियां खाने से पशु पीलिया का शिकार हो जाता है.
- लैंटाना कैमरा की पत्तियों का असर पशु की आंखों पर भी पड़ता है.
- छोटा धतूरा खाने से पशुओं को पीलिया भी हो जाता है.
- छोटा धतूरा किडनी और हॉर्ट पर भी असर डालता है.
- रोडो डेंड्रोन खरपतवार कश्मीर में होती है.
- रोडो डेंड्रोन खाने से भेड़-बकरी को दस्त लग जाते हैं.
- रोडो डेंड्रोन खरपतवार दूध और खून पर भी असर डालती है.
- पत्तेदार स्पेरेज के खाने से पशुओं को दस्त लग जाते हैं.
- पत्तेदार स्पेरेज खाने से पशुओं के शरीर में कमजोरी होने लगती है.
- पत्तेदार स्पेरेज खरपतवार भेड़ के लिए बहुत ही ज्यादा खतरनाक मानी जाती है.
- एस्ट्रा ग्लाओस खरपतवार राजस्थान में होती है.
- एस्ट्रा ग्लाओस खाने से गर्भवती भेड़-बकरियों का गर्भपात हो जाता है.
शरीर में छेद कर देती है पंक्चरवाइन
- पंक्चरवाइन खरपतवार सूखे इलाके में होती है.
- पंक्चरवाइन की चपेट में सबसे ज्यादा भेड़ आती हैं.
- ये भेड़ों की आंखों की रोशनी पर असर डालती है.
- पंक्चरवाइन भेड़ों के खुरों में घाव तक कर देती है.
- इतना ही नहीं पंक्चरवाइन पशुओं के शरीर में पंक्चर (छेद) कर देती है.
- पंक्चरवाइन खरपतवार पशुओं के पेट को भी बुरी तरह से प्रभावित करती है.
खरपतवार से सांस की बीमारी भी होती है
- सूखे की स्थिति होने पर चेनोपोडियम खरपतवार पनपने लगती है.
- चेनोपोडियम में नाइट्रोजन की मात्रा एक हजार पीपीएम तक पहुंच जाती है.
- जब पशु चेनोपोडियम खाता है तो उसे सांस की बीमारी हो जाती है.
- गाजर घास के संपर्क में आने से पशु के शरीर पर सूजन और खुजली हो जाती है.
- जॉनसन घास जहरीली होती है, और इसका असर पशु के पूरे शरीर पर हो सकता है.
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