
पोल्ट्री सेक्टर में भी 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' जैसा कुछ दिखाई दे इसे लेकर पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFI) लगातार हरियाणा सरकार से मांग कर रही है. हाल ही में एक बार फिर पीएफआई का प्रतिनिधि मंडल हरियाणा सरकार के मंत्री, मुख्य सचिव और अलग-अलग विभागों के सचिवों से मिला. इस मौके पर हरियाणा के पोल्ट्री फार्मर से जुड़ी कई बुनियादी समस्याओं को उठाया गया. सरकार ने पोल्ट्री फार्मर की परेशानियों पर संज्ञान लेते हुए कई मांगों पर अपनी सहमति जताई है. साथ ही जल्द से जल्द परेशानियों को दूर करने का आश्वासन भी दिया है.
खासतौर से पर्यावरण से जुड़े मुद्दे पर खास चर्चा की गई. जांच के दौरान किसी भी पोल्ट्री फार्मर का उत्पीड़न न हो इस बात को भी प्रमुखता के साथ उठाया गया. बैठक के दौरान राज्य में पोल्ट्री सेक्टर की तरक्की और विकास से जुड़े कई और अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. जिन्हें 10 से 15 दिनों में समाधान का आश्वासन दिया गया है.
रणपाल ढांडा का कहना है कि इन पहलों से अनावश्यक रेगुलेटरी बाधाएं कम होंगी. 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' बेहतर होगा, निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और हरियाणा के पोल्ट्री सेक्टर को और ज्यादा मजबूती मिलेगी. वहीं इन वादों को सार्थक सुधारों में बदलने के लिए हम हरियाणा सरकार के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं.
इससे पोल्ट्री किसानों को फायदा होगा और राज्य के सबसे महत्वपूर्ण कृषि सेक्टरों में से एक के टिकाऊ विकास में योगदान मिलेगा. उन्होंने ये भी कहा कि हम सब मिलकर एक मजबूत, ज़्यादा प्रगतिशील और किसानों के अनुकूल पोल्ट्री इंडस्ट्री बनाने की कोशिश कर रहे हैं और काफी हद तक इसमे कामयाब भी हो रहे हैं.
शिक्षामंत्री महिपाल ढांडा, हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, सीएम के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन विनय कुमार और पशुपालन विभाग, हरियाणा सरकार के निदेशक डॉ. प्रेम सिंह आदि थे. वहीं पीएफआई की ओर से रविंदर संधू, आजाद राठी, डॉ. राकेश गुप्ता, जगदीश कादयान आदि थे.
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