
अचानक से पशु का दूध उत्पादन घटने लगा. जब डॉक्टर से जांच कराई तो मालूम चला कि सिर्फ दूध उत्पादन ही कम नहीं हो रहा, बल्कि दूध देने वाले पशु के शरीर में खून की कमी भी हो रही है. किसी भी दूध देने वाले पशु में एक साथ दिखाई देने वाले ये दो लक्षण जानलेवा बीमारी बबेसियोसिस के होते हैं. अक्सर ये बीमारी बरसात के दिनों में ज्यादा अटैक करती है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो बबेसियोसिस जिस पैरासाइट के चलते होती है वो नमी में तेजी से पनपता है. अगर वक्त रहते इस बीमारी के लक्षणों को नहीं पहचाना गया, वक्त से पशु का इलाज शुरू नहीं हुआ तो कई बार पशु की मौत तक हो जाती है.
गाय-भैंस में किलनियां और चीचड़ भी होते हैं. पशु इन दोनों से भी बेहद परेशान रहते हैं. वहीं ये दोनों भी बबेसियोसिस बीमारी की वजह भी होते हैं. बबेसियोसिस की प्रजातियों में बबेसिया बोविस, बबेसिया मेजर, बबेसिया बाइजेमिया और बबेसिया डाईवरजेन्स शामलि हैं. इस बीमारी से दूध उत्पादन का घटना, ग्रोथ में कमी का होना आम है.
बबेसियोसिस पैरासाइट पशुओं के खून में चिचड़ियों के माध्यम से प्रवेश कर जाते हैं और रक्त में जाकर लाल रक्त कोशिकाओं में अपनी संख्या बढ़ाने लगते है. इसी वजह से शरीर का हीमोग्लोबिन पेशाब के साथ बाहर निकलने लगता है. जिसके चलते पेशाब का रंग लाल या गहरे भूरे रंग का हो जाता है.
बबेसियोसिस संक्रमित पशु के लक्षणों के आधार पर इलाज शुरू कराएं.
अपने क्षेत्र में किलनियों-चिचढ़ो के प्रसार को रोकने के बारे में जागरुकता फैलाएं.
जो भी पशु थोड़ा भी बीमार दिखें तो उनके खून की जांच कराएं.
पशुचिकित्सक की सलाह से डाईमिनेजीन, एसीट्यूरेट, ऑक्सीट्टासाइक्लिन एंटीबायोटिक और खून बढ़ाने वाली दवाई देनी चाहिए.
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